September 6, 2026

OBC Creamy Layer: Centre Seeks Clear Guidelines After Supreme Court Verdict OBC क्रीमी लेयर पर सुप्रीम कोर्ट का बड़ा फैसला, केंद्र ने मांगे स्पष्ट दिशा-निर्देश

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सर्च न्यूज: सच के साथ:OBC (अन्य पिछड़ा वर्ग) में क्रीमी लेयर की पहचान को लेकर सुप्रीम कोर्ट के 11 मार्च 2026 के फैसले के बाद केंद्र सरकार ने शीर्ष अदालत से इस फैसले को लागू करने के तरीके पर स्पष्ट दिशा-निर्देश मांगे हैं। यह मामला UPSC सिविल सर्विसेज परीक्षा में OBC-NCL (नॉन-क्रीमी लेयर) उम्मीदवारों के सेवा आवंटन से जुड़ा है। सुप्रीम कोर्ट ने कहा था कि किसी उम्मीदवार की क्रीमी लेयर स्थिति केवल माता-पिता की सैलरी के आधार पर तय नहीं की जा सकती। माता-पिता के पद, सेवा-स्थिति और संबंधित संस्थान में उनकी स्थिति को भी ध्यान में रखना जरूरी है।

मामले की जड़ 1993 के OBC आरक्षण संबंधी ऑफिस मेमोरेंडम (OM) और 2004 के एक स्पष्टीकरण से जुड़ी है। कई उम्मीदवारों के माता-पिता PSU, बैंक या अन्य संस्थानों में कार्यरत थे। इन संस्थानों में सरकारी पदों के साथ पदों की समानता तय नहीं होने के कारण अधिकारियों ने कुछ मामलों में माता-पिता की वेतन आय को क्रीमी लेयर निर्धारित करने के लिए आधार बनाया। सुप्रीम कोर्ट ने स्पष्ट किया कि 2004 का स्पष्टीकरण 1993 के मूल ढांचे में ऐसी नई शर्त नहीं जोड़ सकता, जिससे केवल वेतन के आधार पर क्रीमी लेयर का निर्धारण हो।

शीर्ष अदालत ने यह भी माना कि OBC आरक्षण का लाभ वास्तव में सामाजिक और शैक्षणिक रूप से पिछड़े वर्गों तक पहुंचाने के लिए क्रीमी लेयर का बहिष्कार संवैधानिक उद्देश्य का हिस्सा है। साथ ही, समान स्थिति वाले सरकारी और PSU कर्मचारियों के बच्चों के साथ अलग-अलग व्यवहार करना समानता के अधिकार के सवाल को जन्म दे सकता है। अदालत ने संबंधित उम्मीदवारों की पात्रता का नए सिरे से आकलन करने और पात्र पाए जाने वाले उम्मीदवारों को समायोजित करने के लिए आवश्यक अतिरिक्त पद बनाने का निर्देश भी दिया था।

अब केंद्र सरकार चाहती है कि सुप्रीम कोर्ट के इस फैसले की व्यावहारिक व्याख्या और इसे अलग-अलग मामलों में लागू करने की प्रक्रिया को लेकर स्पष्टता हो। खासतौर पर PSU, बैंक और अन्य संगठनों में कार्यरत अभिभावकों के पद और आय का आकलन किस तरीके से किया जाए, इस पर स्पष्ट दिशा-निर्देश महत्वपूर्ण माने जा रहे हैं। इस मामले का असर भविष्य में OBC-NCL प्रमाणपत्र की जांच और UPSC जैसी केंद्रीय भर्ती प्रक्रियाओं में आरक्षण के लाभ की पात्रता तय करने पर पड़ सकता है।