September 5, 2026

The greatest battles fought by renouncing food and water: जब अन्न-जल त्यागकर लड़ी गई सबसे बड़ी लड़ाइयाँ,महात्मा गांधी से वांगचुक तक जानिए किन-किन ने किया आमरण अनशन

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सर्च न्यूज: सच के साथ: भारत में अनशन केवल विरोध का तरीका नहीं, बल्कि लोकतांत्रिक और नैतिक दबाव का एक शक्तिशाली माध्यम रहा है। महात्मा गांधी से लेकर सोनम वांगचुक तक, इन सभी हस्तियों ने अलग-अलग मुद्दों—स्वतंत्रता, सामाजिक न्याय, अलग राज्य, भ्रष्टाचार, मानवाधिकार, पर्यावरण और क्षेत्रीय अधिकारों—के लिए उपवास का सहारा लिया। कई आंदोलनों ने सरकारों को निर्णय बदलने पर मजबूर किया, जबकि कुछ ने समाज में व्यापक जनजागरूकता और नीति-निर्माण पर गहरा प्रभाव छोड़ा।

महात्मा गांधी: सत्याग्रह और अहिंसा का सबसे बड़ा हथियार

महात्मा गांधी ने भारत के स्वतंत्रता आंदोलन में अनशन को नैतिक दबाव और अहिंसक संघर्ष का सबसे प्रभावी माध्यम बनाया। उनका पहला प्रमुख उपवास 1918 में अहमदाबाद मिल मजदूरों के समर्थन में था। इसके बाद उन्होंने कई बार सांप्रदायिक हिंसा रोकने, सामाजिक सुधार लाने और ब्रिटिश सरकार पर दबाव बनाने के लिए अनशन किए।1932 का पूना पैक्ट से पहले किया गया अनशन सबसे ऐतिहासिक माना जाता है। वहीं 1947–48 में देश के विभाजन के बाद दिल्ली और कोलकाता में सांप्रदायिक हिंसा रोकने के लिए उनका आमरण अनशन लोगों के दिलों को झकझोर गया। गांधी जी के अनशन केवल राजनीतिक नहीं बल्कि नैतिक और सामाजिक चेतना जगाने का माध्यम थे।

इरोम शर्मिला: दुनिया का सबसे लंबा भूख हड़ताल आंदोलन

मणिपुर की सामाजिक कार्यकर्ता इरोम शर्मिला ने 2 नवंबर 2000 को AFSPA (Armed Forces Special Powers Act) हटाने की मांग को लेकर भूख हड़ताल शुरू की। उन्होंने लगभग 16 वर्षों तक भोजन नहीं किया और उन्हें नाक के माध्यम से तरल आहार दिया जाता रहा।उनका यह आंदोलन दुनिया की सबसे लंबी भूख हड़तालों में गिना जाता है। 2016 में उन्होंने अपना अनशन समाप्त किया और लोकतांत्रिक राजनीति के माध्यम से अपनी लड़ाई जारी रखने का निर्णय लिया।

अन्ना हज़ारे: भ्रष्टाचार के खिलाफ जन आंदोलन

सामाजिक कार्यकर्ता अन्ना हज़ारे ने 2011 में जन लोकपाल कानून की मांग को लेकर दिल्ली के जंतर-मंतर और बाद में रामलीला मैदान में अनशन किया। उनके आंदोलन ने पूरे देश में भ्रष्टाचार के खिलाफ अभूतपूर्व जनसमर्थन खड़ा किया।इस आंदोलन में लाखों लोग सड़कों पर उतरे और युवाओं की बड़ी भागीदारी देखने को मिली। इसके बाद संसद ने लोकपाल कानून की दिशा में कदम बढ़ाए और अंततः लोकपाल एवं लोकायुक्त अधिनियम, 2013 लागू हुआ।

स्वामी सानंद (प्रो. जी.डी. अग्रवाल)गंगा की अविरल (निरंतर) धारा सुनिश्चित करना

22 जून 2018 को स्वामी सानंद ने गंगा नदी की अविरलता और निर्मलता बनाए रखने, गंगा पर बनने वाली जलविद्युत परियोजनाओं पर रोक लगाने और गंगा संरक्षण के लिए प्रभावी कानून बनाने की मांग को लेकर हरिद्वार में आमरण अनशन शुरू किया। उनका अनशन लगातार 111 दिनों तक चला। 11 अक्टूबर 2018 को उनकी तबीयत बेहद बिगड़ गई और अस्पताल में उनका निधन हो गया।

सोनम वांगचुक: लद्दाख के अधिकारों के लिए संघर्ष

शिक्षाविद और नवाचार विशेषज्ञ सोनम वांगचुक ने 2024 में लद्दाख को संविधान की छठी अनुसूची में शामिल करने, पर्यावरण संरक्षण, स्थानीय लोगों के अधिकार और पूर्ण राज्य का दर्जा देने जैसी मांगों को लेकर कई दिनों तक उपवास किया।उन्होंने अपने आंदोलन को पूरी तरह शांतिपूर्ण रखा और युवाओं से भी अहिंसक तरीके से लोकतांत्रिक संघर्ष करने की अपील की। उनके अभियान ने लद्दाख के पर्यावरण, संस्कृति और राजनीतिक अधिकारों को राष्ट्रीय स्तर पर चर्चा का विषय बना दिया।

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