November 5, 2026

5 सितंबर की वो कहानी, जिसने एक जन्मदिन को बना दिया हर शिक्षक के सम्मान का दिन

file_00000000ebec8211954e0b456784eda8

सर्च न्यूज: सच के साथ: कहानी शुरू होती है *5 सितंबर 1888* से, जब तमिलनाडु के तिरुत्तनी में एक ऐसे बच्चे का जन्म हुआ, जिसने आगे चलकर भारत के शिक्षा जगत में अपनी अलग पहचान बनाई। उनका नाम था *डॉ. सर्वपल्ली राधाकृष्णन।*राधाकृष्णन जी सिर्फ एक महान दार्शनिक और विद्वान ही नहीं, बल्कि एक समर्पित शिक्षक भी थे। उनका मानना था कि शिक्षक समाज और देश के भविष्य को तैयार करता है।

समय बीता और डॉ. राधाकृष्णन भारत के पहले *उपराष्ट्रपति* और फिर दूसरे राष्ट्रपति बने।जब उनके छात्रों और दोस्तों ने उनका जन्मदिन मनाने की इच्छा जताई, तो उन्होंने एक ऐसी बात कही जिसने इस दिन का अर्थ ही बदल दिया। उन्होंने सुझाव दिया कि उनके जन्मदिन को सिर्फ उनका जन्मदिन न बनाकर देश के सभी शिक्षकों के सम्मान में मनाया जाए।

यहीं से भारत में 5 सितंबर को Teachers’ Day मनाने की परंपरा शुरू हुई।*आज इस दिन स्कूलों में बच्चे अपने शिक्षकों को धन्यवाद देते हैं, कार्यक्रम आयोजित करते हैं और बताते हैं कि उनके जीवन में एक शिक्षक की क्या अहमियत है।क्योंकि शिक्षक सिर्फ किताबों का पाठ नहीं पढ़ाता—वह सपने देखना, सही रास्ता चुनना और आगे बढ़ना भी सिखाता है।

यही वजह है कि 5 सितंबर सिर्फ एक तारीख नहीं, बल्कि देश के हर शिक्षक के सम्मान की कहानी है

You may have missed