September 6, 2026

Singer Anuradha Paudwal expressed her displeasure regarding the country’s education:पत्रकार शुभांकर मिश्रा के पॉडकास्ट इंटरव्यू में सिंगर अनुराधा पौडवाल ने देश की शिक्षा और कानून व्यवस्था को लेकर व्यक्त कि नाराजगी

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सर्च न्यूज: सच के साथ:मशहूर बॉलीवुड और भजन गायिका अनुराधा पौडवाल ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और केंद्र की भाजपा सरकार के भारत को “विश्वगुरु” बनाने के दावे पर तीखा हमला बोला है। वरिष्ठ पत्रकार शुभांकर मिश्रा के एक पॉडकास्ट इंटरव्यू में उन्होंने देश की वर्तमान शिक्षा व्यवस्था और प्रशासनिक विसंगतियों को लेकर गहरी नाराजगी व्यक्त की। दैनिक भास्कर की इस रिपोर्ट के अनुसार, अनुराधा पौडवाल का यह बयान सोशल मीडिया और राजनीतिक हलकों में बेहद तेजी से वायरल हो रहा है।

इंटरव्यू के दौरान गायिका ने देश में बंद पड़े सरकारी स्कूलों का मुद्दा उठाते हुए कहा, “कुछ सालों पहले तक मेरे मन में भी दृढ़ता से आता था कि हम विश्वगुरु बनेंगे, लेकिन अब जमीनी हकीकत इसके बिल्कुल उलट दिख रही है। देश में वर्तमान समय में 93 हजार सरकारी स्कूल बंद पड़े हैं, ऐसे में ‘विश्वगुरु’ का आधार क्या है?” उन्होंने तंज कसते हुए आगे कहा कि सरकार को या तो ‘विश्वगुरु-विश्वगुरु’ कहना बंद कर देना चाहिए या फिर देश में चल रहे इस ‘नॉनसेंस’ (अव्यवस्था) को तुरंत रोकना चाहिए।शिक्षा व्यवस्था के साथ-साथ अनुराधा पौडवाल ने देश की कानून व्यवस्था और धार्मिक स्थलों की सुरक्षा पर भी चिंता जाहिर की। अयोध्या का परोक्ष रूप से जिक्र करते हुए उन्होंने कहा कि एक तरफ देश में रामराज्य लाने की बड़ी-बड़ी बातें की जाती हैं, और दूसरी तरफ पवित्र मंदिर के चढ़ावे में ही डाका पड़ जाता है। उन्होंने सवाल उठाया कि जब बुनियादी स्तर पर नागरिकों को सही शिक्षा नहीं मिल पा रही है और व्यवस्थाएं पूरी तरह चरमरा चुकी हैं, तो हम केवल ख्वाबों के दम पर आगे नहीं बढ़ सकते।

पद्मश्री और नेशनल अवॉर्ड से सम्मानित गायिका के इस बेबाक बयान ने इंटरनेट पर एक नई बहस को जन्म दे दिया है। जहां एक बड़ा वर्ग उनके इस साहस और शिक्षा व्यवस्था पर उठाए गए व्यावहारिक सवालों की सराहना कर रहा है, वहीं दूसरी तरफ सरकार समर्थकों के बीच इस बात को लेकर तीखी प्रतिक्रियाएं देखने को मिल रही हैं। इस विवाद के बढ़ने के बाद, गायिका ने बाद में स्पष्टीकरण देते हुए यह भी कहा कि उनके बयानों को तोड़-मरोड़ कर पेश किया गया है, हालांकि देश की प्राथमिक शिक्षा को मजबूत करने की उनकी चिंता पूरी तरह जायज है।