November 4, 2026

किसान की बेटी ने रचा इतिहास, अंतरिक्ष मिशन की बनी बड़ी ताकत

Screenshot_20260726_121438_Comet

सर्च न्यूज: सच के साथ:

भारत के निजी अंतरिक्ष क्षेत्र ने हाल ही में ऐतिहासिक उपलब्धि हासिल की, जब स्काईरूट एयरोस्पेस के विकसित देश के पहले निजी ऑर्बिटल रॉकेट विक्रम-1 ने सफलतापूर्वक अंतरिक्ष की कक्षा में प्रवेश किया। इस सफलता के पीछे सैकड़ों वैज्ञानिकों और इंजीनियरों की मेहनत रही, जिनमें गुजरात के किसान परिवार से आने वाली एयरोस्पेस इंजीनियर पृथ्वी संघानी का नाम भी प्रमुखता से सामने आया है। उन्होंने रॉकेट के सबसे महत्वपूर्ण ऑटोपायलट और गाइडेंस सिस्टम के विकास में अहम भूमिका निभाई।

पृथ्वी संघानी का सफर एक साधारण किसान परिवार से शुरू होकर भारत के अग्रणी स्पेस मिशन तक पहुंचा। उन्होंने राजकोट से इंजीनियरिंग की पढ़ाई पूरी करने के बाद डिफेंस इंस्टीट्यूट ऑफ एडवांस्ड टेक्नोलॉजी (DIAT) से एयरोस्पेस इंजीनियरिंग में उच्च शिक्षा प्राप्त की। इसके बाद उन्होंने डीआरडीओ की रक्षा अनुसंधान प्रयोगशाला में कार्य किया और बाद में स्काईरूट एयरोस्पेस से जुड़कर विक्रम-1 मिशन का हिस्सा बनीं।

स्काईरूट में पृथ्वी संघानी ने विक्रम-1 के ऑटोपायलट कंट्रोल और गाइडेंस सिस्टम पर काम किया, जो उड़ान के दौरान रॉकेट को सही दिशा और निर्धारित मार्ग पर बनाए रखने का महत्वपूर्ण कार्य करता है। यह तकनीक किसी भी अंतरिक्ष मिशन की सफलता की रीढ़ मानी जाती है। विक्रम-1 की सफल उड़ान के साथ भारत उन चुनिंदा देशों में शामिल हो गया है, जहां किसी निजी कंपनी ने सफलतापूर्वक ऑर्बिटल रॉकेट लॉन्च किया है।

पृथ्वी संघानी की उपलब्धि आज देशभर के युवाओं, खासकर विज्ञान और इंजीनियरिंग के क्षेत्र में करियर बनाने का सपना देखने वाली छात्राओं के लिए प्रेरणा बन गई है। उनकी कहानी यह साबित करती है कि मजबूत शिक्षा, मेहनत और दृढ़ संकल्प के बल पर साधारण पृष्ठभूमि से निकलकर भी अंतरिक्ष विज्ञान जैसे चुनौतीपूर्ण क्षेत्र में वैश्विक स्तर की पहचान बनाई जा सकती है।

You may have missed