किसान की बेटी ने रचा इतिहास, अंतरिक्ष मिशन की बनी बड़ी ताकत
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पृथ्वी संघानी का सफर एक साधारण किसान परिवार से शुरू होकर भारत के अग्रणी स्पेस मिशन तक पहुंचा। उन्होंने राजकोट से इंजीनियरिंग की पढ़ाई पूरी करने के बाद डिफेंस इंस्टीट्यूट ऑफ एडवांस्ड टेक्नोलॉजी (DIAT) से एयरोस्पेस इंजीनियरिंग में उच्च शिक्षा प्राप्त की। इसके बाद उन्होंने डीआरडीओ की रक्षा अनुसंधान प्रयोगशाला में कार्य किया और बाद में स्काईरूट एयरोस्पेस से जुड़कर विक्रम-1 मिशन का हिस्सा बनीं।
स्काईरूट में पृथ्वी संघानी ने विक्रम-1 के ऑटोपायलट कंट्रोल और गाइडेंस सिस्टम पर काम किया, जो उड़ान के दौरान रॉकेट को सही दिशा और निर्धारित मार्ग पर बनाए रखने का महत्वपूर्ण कार्य करता है। यह तकनीक किसी भी अंतरिक्ष मिशन की सफलता की रीढ़ मानी जाती है। विक्रम-1 की सफल उड़ान के साथ भारत उन चुनिंदा देशों में शामिल हो गया है, जहां किसी निजी कंपनी ने सफलतापूर्वक ऑर्बिटल रॉकेट लॉन्च किया है।
पृथ्वी संघानी की उपलब्धि आज देशभर के युवाओं, खासकर विज्ञान और इंजीनियरिंग के क्षेत्र में करियर बनाने का सपना देखने वाली छात्राओं के लिए प्रेरणा बन गई है। उनकी कहानी यह साबित करती है कि मजबूत शिक्षा, मेहनत और दृढ़ संकल्प के बल पर साधारण पृष्ठभूमि से निकलकर भी अंतरिक्ष विज्ञान जैसे चुनौतीपूर्ण क्षेत्र में वैश्विक स्तर की पहचान बनाई जा सकती है।
