Jamshedpur: जमशेदपुर में mParivahan APK के नाम पर साइबर ठगी का नया तरीका, WhatsApp हैक कर महिला से ठगी की कोशिश
सर्च न्यूज: सच के साथ: जमशेदपुर, 1 सितंबर 2026: जमशेदपुर में साइबर ठगी का एक नया तरीका सामने आया है, जिसमें ठग mParivahan के नाम से फर्जी APK फाइल भेजकर लोगों के मोबाइल और WhatsApp को निशाना बना रहे हैं। सोशल मीडिया पर सामने आई इस घटना में कथित तौर पर एक थाना ड्राइवर के WhatsApp अकाउंट को हैक कर उसके जरिए एक महिला से ठगी की कोशिश की गई। हालांकि, इस खास मामले की पुलिस शिकायत या रकम से जुड़ी स्वतंत्र आधिकारिक पुष्टि मुझे उपलब्ध नहीं मिली है, इसलिए इसे फिलहाल रिपोर्टेड/कथित घटना के रूप में ही देखा जाना चाहिए।
WhatsApp अकाउंट भी हो सकता है निशाना: फर्जी APK को जरूरी permissions मिलने के बाद साइबर अपराधी SMS, कॉल और अन्य संवेदनशील जानकारी तक पहुंच बनाने की कोशिश कर सकते हैं। इसके बाद compromised WhatsApp अकाउंट से उसके परिचितों को संदेश भेजकर पैसे मांगने जैसी ठगी की जा सकती है। जमशेदपुर के ग्रामीण इलाकों में भी हाल में WhatsApp अकाउंट हैक कर परिचितों से पैसे मांगने वाली घटनाएं सामने आई हैं।
mParivahan के नाम से भेजी गई हर APK असली नहीं: सरकारी NextGen mParivahan ऐप मौजूद है, लेकिन WhatsApp या SMS के जरिए भेजी गई APK को आधिकारिक मान लेना खतरनाक हो सकता है। CERT-In ने स्पष्ट रूप से सलाह दी है कि RTO/e-Challan से जुड़े किसी भी संदेश के साथ आने वाली संदिग्ध APK को इंस्टॉल न करें और वाहन चालान की जानकारी केवल आधिकारिक माध्यम से जांचें।
मोबाइल में APK इंस्टॉल कर चुके हैं तो क्या करें? यदि किसी व्यक्ति ने ऐसी संदिग्ध APK इंस्टॉल कर ली है, तो उसे तुरंत मोबाइल इंटरनेट/Wi-Fi बंद, संदिग्ध ऐप अनइंस्टॉल और विश्वसनीय सुरक्षा स्कैन चलाना चाहिए। बैंकिंग या UPI से जुड़ी जानकारी प्रभावित होने की आशंका हो तो बैंक से तुरंत संपर्क करना चाहिए और साइबर वित्तीय धोखाधड़ी की स्थिति में 1930 पर शिकायत करनी चाहिए।
सबसे जरूरी सावधानी: WhatsApp पर आई कोई भी APK—खासकर “mParivahan”, “RTO Challan” या “e-Challan” नाम वाली—बिना सत्यापन इंस्टॉल न करें। किसी परिचित के नंबर से अचानक पैसे की मांग आए तो भी फोन करके पुष्टि किए बिना भुगतान न करें।
