टाटा संस के नेतृत्व विवाद पर राजनीतिक बयानबाजी तेज, राहुल गांधी और निर्मला सीतारमण आमने-सामने
नई दिल्ली, 28 अक्टूबर 2026। टाटा समूह में नेतृत्व को लेकर चल रहे विवाद ने बुधवार को राजनीतिक रूप ले लिया। लोकसभा में विपक्ष के नेता राहुल गांधी ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर आरोप लगाया कि टाटा समूह को गलत तरीके से बर्बाद किया जा रहा है और कारोबारी जगत के नेता इस मुद्दे पर खुलकर बोलने से बच रहे हैं। उन्होंने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह पर निशाना साधते हुए कहा कि भारतीय कारोबार किसी राजनीतिक दल की निजी संपत्ति नहीं है।
इस विवाद की पृष्ठभूमि टाटा संस के चेयरमैन एन. चंद्रशेखरन की दोबारा नियुक्ति को लेकर सामने आया मतभेद है। टाटा ट्रस्ट्स के चेयरमैन नोएल टाटा ने 17 सितंबर को हुई बोर्ड बैठक में चंद्रशेखरन की पुनर्नियुक्ति से जुड़े प्रस्ताव पर सवाल उठाए हैं। उन्होंने कंपनी से बैठक की रिकॉर्डिंग, कार्यवाही और मतदान से संबंधित विवरण मांगे हैं। इस मामले में कंपनी के नियमों और बोर्ड की प्रक्रिया को लेकर विवाद है; इसलिए इसे किसी आपराधिक कृत्य का प्रमाण मानने के बजाय संबंधित तथ्यों और कानूनी प्रक्रिया के संदर्भ में देखना जरूरी है।
निर्मला सीतारमण ने अपने जवाब में उद्योगों को समर्थन देने, निवेश बढ़ाने और युवाओं के भविष्य को सुरक्षित करने के लिए राजनीतिक दलों तथा संस्थाओं से रचनात्मक संवाद की अपील की। उन्होंने न्यायपालिका की भूमिका का भी उल्लेख किया। वहीं, राहुल गांधी ने बाद में जवाब देते हुए टाटा समूह के मामले में राजनीतिक हस्तक्षेप को लेकर सवाल उठाए। इस तरह टाटा समूह का आंतरिक नेतृत्व विवाद अब राजनीतिक बहस का विषय बन गया है। मामले के विभिन्न पहलुओं पर आगे की स्थिति संबंधित पक्षों के बयानों और उपलब्ध तथ्यों से स्पष्ट होगी।
