आईडीबीआई बैंक के प्रस्तावित निजीकरण के खिलाफ जमशेदपुर में आक्रोश: दूसरे दिन भी भूख हड़ताल पर डटे कर्मचारी
जमशेदपुर के बिष्टुपुर में वोल्टास बिल्डिंग के सामने यूनाइटेड फोरम ऑफ आईडीबीआई ऑफिसर्स एंड एम्प्लॉइज के बैनर तले आईडीबीआई बैंक (IDBI Bank) के निजीकरण और विनिवेश के फैसले के विरोध में लगातार दूसरे दिन मंगलवार को भी कर्मचारियों की भूख हड़ताल और धरना-प्रदर्शन जारी रहा। केंद्र सरकार और भारतीय जीवन बीमा निगम (LIC) द्वारा बैंक में अपनी कुल 60.72 प्रतिशत हिस्सेदारी बेचने और प्रबंधन का नियंत्रण निजी हाथों (कनाडा के फेयरफैक्स ग्रुप) में सौंपने के फैसले से बैंककर्मी बेहद आक्रोशित हैं। प्रदर्शन में महिला और पुरुष अधिकारियों सहित बड़ी संख्या में कर्मचारियों ने एकजुट होकर केंद्र सरकार के खिलाफ जोरदार नारेबाजी की और सार्वजनिक क्षेत्र का स्वरूप बनाए रखने की मांग की।
कर्मचारी संगठनों ने सरकार के इस कदम से भविष्य में पैदा होने वाले गंभीर खतरों की ओर भी ध्यान आकर्षित किया। उन्हें आशंका है कि निजी प्रबंधन आने के बाद कर्मचारियों की छंटनी, सेवा शर्तों में मनमाना बदलाव, पेंशन, ग्रेच्युटी और एससी-एसटी व दिव्यांगों के लिए तय आरक्षण नीतियों को दरकिनार किया जा सकता है। इसके साथ ही वक्ताओं ने चेताया कि निजीकरण के बाद आम नागरिकों, छोटे व्यापारियों, किसानों और एमएसएमई (MSME) क्षेत्र को मिलने वाली प्राथमिकताएं खत्म हो जाएंगी, क्योंकि निजी कंपनियों का एकमात्र उद्देश्य केवल मुनाफा कमाना होता है। इस देशव्यापी आंदोलन को अन्य बैंकों के संगठनों ने भी समर्थन दिया है और प्रदर्शनकारियों ने मांग की है कि जब तक सरकार इस विनिवेश प्रक्रिया को तत्काल रद्द नहीं करती, तब तक उनका यह लोकतांत्रिक संघर्ष और तेज किया जाएगा।
