September 6, 2026

परिसीमन पर बंधु तिर्की का बड़ा हमला, 30 अगस्त को रांची में जुटेगा आदिवासी समाज

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सर्च न्यूज: सच के साथ: जमशेदपुर/रांची: झारखंड के पूर्व मंत्री बंधु तिर्की ने प्रस्तावित लोकसभा और विधानसभा परिसीमन को लेकर केंद्र सरकार पर तीखा हमला बोला है। उन्होंने कहा कि परिसीमन को केवल निर्वाचन क्षेत्रों के पुनर्गठन के रूप में नहीं देखा जा सकता, बल्कि इसका सीधा संबंध झारखंड के आदिवासी समाज के राजनीतिक प्रतिनिधित्व और संवैधानिक अधिकारों से है।

बंधु तिर्की ने कहा कि यदि परिसीमन के दौरान अनुसूचित जनजाति (एसटी) के लिए आरक्षित विधानसभा और लोकसभा सीटों में कमी की जाती है, तो इसका पुरजोर विरोध किया जाएगा। उनका कहना है कि यदि कुल सीटों की संख्या बढ़ती है, तो एसटी आरक्षित सीटों में भी मौजूदा अनुपात के अनुसार वृद्धि होनी चाहिए।उन्होंने तर्क दिया कि झारखंड में खनन, रेलवे, सड़क, बांध और बड़े उद्योगों के लिए लंबे समय से आदिवासी समुदाय को विस्थापन का सामना करना पड़ा है। ऐसे में केवल जनसंख्या के आंकड़ों के आधार पर राजनीतिक प्रतिनिधित्व कम करना आदिवासी समाज के लिए गंभीर चिंता का विषय हो सकता है।

30 अगस्त को रांची में आदिवासी एकता महाजुटान: इन मुद्दों को लेकर 30 अगस्त 2026 को रांची के मोरहाबादी मैदान में ‘आदिवासी एकता महाजुटान रैली’ आयोजित की जाएगी। बंधु तिर्की ने आदिवासी समाज के सभी वर्गों और जागरूक नागरिकों से रैली में शामिल होकर संवैधानिक अधिकारों की रक्षा के लिए एकजुट होने की अपील की है।रैली में एसटी आरक्षित सीटों में कटौती नहीं करने, परिसीमन प्रक्रिया में झारखंड की विशेष परिस्थितियों को ध्यान में रखने और आदिवासी जनप्रतिनिधियों एवं सामाजिक संगठनों से व्यापक विचार-विमर्श करने जैसी मांगें उठाई जाएंगी।

बंधु तिर्की ने यह भी कहा कि परिसीमन की प्रक्रिया पारदर्शी होनी चाहिए और इसमें पांचवीं अनुसूची क्षेत्र, ऐतिहासिक विस्थापन, पलायन तथा सीएनटी-एसपीटी एक्ट जैसे झारखंड से जुड़े विशेष संवैधानिक पहलुओं को ध्यान में रखा जाना चाहिए।परिसीमन को लेकर झारखंड में आदिवासी संगठनों की सक्रियता लगातार बढ़ रही है। ऐसे में 30 अगस्त की प्रस्तावित महाजुटान रैली को आदिवासी राजनीतिक प्रतिनिधित्व और संवैधानिक अधिकारों के मुद्दे पर एक महत्वपूर्ण शक्ति-प्रदर्शन के रूप में देखा जा रहा है।