November 5, 2026

नए वोटर को देना होगा माता-पिता के SIR का ब्योरा; चुनाव आयोग बोला- इससे पहचान-रिकॉर्ड मिलाना आसान होगा

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सर्च न्यूज: सच के साथ: भारत निर्वाचन आयोग (ECI) ने ऑनलाइन मतदाता पंजीकरण प्रक्रिया में एक बड़ा बदलाव किया है। इसके तहत अब फॉर्म-6 भरकर वोटर लिस्ट में नाम शामिल कराने वाले हर नए और पहली बार आवेदन करने वाले मतदाताओं को अपने माता-पिता के स्पेशल इंटेंसिव रिवीजन (SIR) का ब्योरा देना अनिवार्य कर दिया गया है। पहले यह नियम केवल उन पुराने वोटर्स के सत्यापन के लिए लागू था जो पिछली सुधार प्रक्रियाओं में छूट गए थे, लेकिन अब निर्वाचन आयोग के निर्देशों के बाद इसे नए आवेदकों के लिए भी पूरी तरह से अनिवार्य बना दिया गया है।

चुनाव आयोग के अधिकारियों के अनुसार, इस नए नियम को लागू करने का मुख्य उद्देश्य पहचान और चुनावी रिकॉर्ड का मिलान (मार्क-मैपिंग) अधिक आसान और सटीक बनाना है। ऑनलाइन पोर्टल के माध्यम से फॉर्म-6 भरते समय नए मतदाताओं को एक अतिरिक्त डिक्लेरेशन (घोषणापत्र) सेक्शन को पूरा करना होगा, जिसमें माता-पिता के पिछले एसआईआर रिकॉर्ड जैसे कि विधानसभा क्षेत्र, बूथ नंबर और वोटर लिस्ट की क्रम संख्या आदि की जानकारी देनी होगी। यदि कोई आवेदक इस घोषणापत्र को नहीं भरता है, तो ऑनलाइन प्रणाली में आवेदन प्रक्रिया आगे नहीं बढ़ पाएगी।इस कदम के फायदों को लेकर आयोग ने स्पष्ट किया है कि इससे चुनावी डेटाबेस को शुद्ध रखने में मदद मिलेगी और मतदाता सूची से डुप्लिकेट, मृत, स्थानांतरित या फर्जी वोटर्स को हटाना अधिक सुगम हो जाएगा। इसके अतिरिक्त, नए आवेदकों को अब अपने पहचान सत्यापन के लिए बहुत अधिक अतिरिक्त दस्तावेज़ (सपोर्टिंग डॉक्युमेंट्स) अपलोड करने की आवश्यकता नहीं होगी, क्योंकि माता-पिता के प्रामाणिक एसआईआर विवरण से ही उनकी पहचान को आसानी से मैप कर लिया जाएगा। हालांकि, यह नियम फिलहाल भारत निर्वाचन आयोग के पोर्टल पर केवल ऑनलाइन आवेदन करने वालों के लिए ही दिखाई दे रहा है।