November 5, 2026

मनरेगा में बड़ा बदलाव! राज्यों पर बढ़ेगा हजारों करोड़ का बोझ

Karnataka-flagsG47FC7L5D.3.jpg

देश की ग्रामीण रोजगार व्यवस्था में बड़ा बदलाव लागू हो गया है। 1 जुलाई से विकसित भारत गारंटी फॉर रोजगार एवं आजीविका मिशन (ग्रामीण) – VB-G RAM G लागू होने के साथ ही वर्षों से चल रही मनरेगा व्यवस्था में व्यापक परिवर्तन शुरू हो गया है। हालांकि कई राज्यों ने इस नई व्यवस्था पर गंभीर चिंता जताई है। उनका कहना है कि इससे रोजगार योजना का वित्तीय बोझ अब पहले की तुलना में कहीं अधिक राज्यों को उठाना पड़ेगा।

विश्लेषण के अनुसार, यदि नई व्यवस्था पूरी तरह लागू होती है तो 2026-27 में राज्यों का खर्च लगभग 51,000 करोड़ रुपये तक पहुंच सकता है। तुलना करें तो 2024-25 में राज्यों ने इस मद में करीब 7,600 से 7,700 करोड़ रुपये ही खर्च किए थे। यानी राज्यों का वित्तीय भार लगभग छह गुना बढ़ने की आशंका है। विशेषज्ञों का मानना है कि इससे कई राज्यों के बजट पर अतिरिक्त दबाव पड़ सकता है।

मनरेगा वर्ष 2005 से ग्रामीण परिवारों को रोजगार की कानूनी गारंटी देने वाली देश की सबसे महत्वपूर्ण योजनाओं में से एक रही है। नई VB-G RAM G व्यवस्था में केंद्र और राज्यों के बीच खर्च की जिम्मेदारी के स्वरूप में बदलाव को लेकर सबसे अधिक विवाद है। राज्यों का कहना है कि यदि केंद्र का वित्तीय योगदान घटता है तो गरीब और ग्रामीण क्षेत्रों में रोजगार कार्यक्रमों को सुचारु रूप से चलाना चुनौतीपूर्ण हो सकता है।

फिलहाल केंद्र सरकार का कहना है कि नई व्यवस्था ग्रामीण रोजगार और आजीविका को अधिक प्रभावी एवं परिणामोन्मुख बनाएगी। वहीं कई राज्य सरकारें इस मॉडल की वित्तीय व्यवहार्यता और उसके दीर्घकालिक प्रभावों पर सवाल उठा रही हैं। आने वाले महीनों में यह स्पष्ट होगा कि यह बदलाव ग्रामीण रोजगार को नई दिशा देता है या राज्यों के लिए वित्तीय चुनौती बनकर उभरता है।