November 5, 2026

MMDR संशोधन विधेयक के खिलाफ पोटका में JMM का जनजागरण अभियान, विधायक संजीव सरदार ने ग्रामीणों को किया जागरूक

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सर्च न्यूज: सच के साथ: पोटका: खान एवं खनिज (विकास एवं विनियमन) संशोधन विधेयक-2026 को लेकर झारखंड में राजनीतिक विरोध तेज हो गया है। इसी कड़ी में झारखंड मुक्ति मोर्चा (JMM) ने पोटका प्रखंड के उदाल गांव में जनजागरण अभियान चलाया। अभियान का नेतृत्व पोटका विधायक संजीव सरदार ने किया। उन्होंने ग्रामीणों के बीच पहुंचकर विधेयक के प्रावधानों और इसके संभावित प्रभावों को लेकर अपनी पार्टी का पक्ष रखा।

संजीव सरदार ने कहा कि JMM केंद्रीय कमेटी के निर्देश पर पार्टी कार्यकर्ताओं को गांव, टोला और मोहल्लों तक पहुंचकर MMDR संशोधन विधेयक के बारे में लोगों को जानकारी देने की जिम्मेदारी दी गई है। उनका कहना है कि यह अभियान केवल राजनीतिक विरोध तक सीमित नहीं है, बल्कि झारखंड के प्राकृतिक संसाधनों, आर्थिक अधिकारों और राज्य के हितों से जुड़ा विषय है

विधायक ने कहा कि झारखंड खनिज संपदा से समृद्ध राज्य है और खनिजों से मिलने वाला राजस्व राज्य की अर्थव्यवस्था तथा विकास योजनाओं में महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है। उन्होंने आशंका जताई कि संशोधन के कारण राज्य के अधिकारों या राजस्व पर असर पड़ने की स्थिति में विकास एवं कल्याणकारी योजनाएं प्रभावित हो सकती हैं। उन्होंने केंद्र से झारखंड की कथित 1.36 लाख करोड़ रुपये की बकाया राशि का मुद्दा भी उठाया और कहा कि राज्य के आर्थिक संसाधनों पर दबाव बढ़ने का असर आम जनता पर पड़ सकता है। यह राशि और इसके संबंध में किए गए राजनीतिक दावे विधायक के बयान के रूप में हैं।

संजीव सरदार ने कहा कि राज्य के संसाधनों से मइया सम्मान योजना, अबुआ आवास योजना, सामाजिक सुरक्षा पेंशन, शिक्षा, स्वास्थ्य, सड़क और पेयजल जैसी योजनाओं को संचालित करने में मदद मिलती है। उन्होंने दावा किया कि राज्य के राजस्व संसाधनों पर असर पड़ने से इन योजनाओं पर भी दबाव बढ़ सकता है।

विधायक ने झारखंड के पारंपरिक जल, जंगल और जमीन के अधिकारों का मुद्दा उठाते हुए ग्रामीणों से एकजुट रहने की अपील की। उन्होंने कहा कि फिलहाल पार्टी का जोर लोगों को विधेयक की जानकारी देने और लोकतांत्रिक तरीके से अपनी बात रखने पर है। जरूरत पड़ने पर आंदोलन को और व्यापक करने की बात भी कही गई।

MMDR संशोधन विधेयक को लेकर केंद्र सरकार और झारखंड के सत्तारूढ़ दलों के तर्क अलग-अलग हैं। केंद्रीय खान मंत्रालय के अनुसार, संसद के दोनों सदनों ने 13 अगस्त 2026 को संशोधन विधेयक पारित किया और इसका उद्देश्य प्रमुख खनिज क्षेत्र में दीर्घकालिक स्थिरता लाना तथा राष्ट्रीय स्तर पर एक समान व्यवस्था सुनिश्चित करना है। मंत्रालय का कहना है कि राज्यों को रॉयल्टी और नीलामी से मिलने वाला राजस्व जारी रहेगा।वहीं, JMM और कांग्रेस का आरोप है कि संशोधन से झारखंड जैसे खनिज-संपन्न राज्यों के आर्थिक अधिकार और राजस्व प्रभावित हो सकते हैं। इसी मुद्दे पर JMM ने 31 अगस्त तक जनजागरण अभियान और 7 सितंबर को प्रखंड मुख्यालयों पर धरना देने का कार्यक्रम घोषित किया है