September 5, 2026

Major revelation in JPSC irregularities: JPSC धांधली में बड़ा खुलासा: WhatsApp पर शेयर होती थी OMR की जानकारी, श्वेता गुप्ता और एल. ख्यांगते की भूमिका पर गंभीर सवाल

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सर्च न्यूज: सच के साथ: रांची: झारखंड लोक सेवा आयोग (JPSC) की परीक्षाओं में कथित अनियमितताओं की जांच कर रही CID के सामने लगातार नए तथ्य सामने आ रहे हैं। जांच में OMR शीट और परीक्षा से जुड़ी गोपनीय जानकारी WhatsApp के जरिए साझा किए जाने के आरोप सामने आए हैं। इस पूरे मामले में JPSC की तत्कालीन उप परीक्षा नियंत्रक श्वेता गुप्ता और तत्कालीन अध्यक्ष एल. ख्यांगते की भूमिका जांच के दायरे में है

WhatsApp के जरिए साझा होने की बात: CID जांच से जुड़े बयानों के अनुसार, परीक्षा की उत्तर-कुंजी और अन्य महत्वपूर्ण जानकारी OMR शीट के मूल्यांकन से पहले ही कुछ लोगों के बीच WhatsApp के माध्यम से साझा की गई थी। आरोप है कि इस जानकारी का इस्तेमाल बाद में OMR और OSM में कथित हेरफेर के लिए किया गया। जांच में यह भी आरोप सामने आया है कि कुछ अभ्यर्थियों से संपर्क करने के लिए एजेंटों का इस्तेमाल किया जाता था और सेटिंग होने के बाद OMR/OSM में कथित मैनिपुलेशन किया जाता था। इस संबंध में CID ने कई लोगों से पूछताछ की है।

श्वेता गुप्ता की भूमिका पर जांच: CID के समक्ष दिए गए बयानों में श्वेता गुप्ता की भूमिका को लेकर कई गंभीर दावे सामने आए हैं। जांच एजेंसी यह पता लगाने की कोशिश कर रही है कि परीक्षा प्रक्रिया में उन्हें कितनी जानकारी थी और OMR तथा परिणाम तैयार करने की प्रक्रिया में उनकी वास्तविक भूमिका क्या थी। रिपोर्टों के मुताबिक, श्वेता गुप्ता को परीक्षा नियंत्रक की अनुपस्थिति के दौरान कई महत्वपूर्ण जिम्मेदारियां दी गई थीं। बाद में उन्हें परीक्षा नियंत्रक का लिखित प्रभार भी दिए जाने की बात सामने आई है

एल. ख्यांगते पर भी उठे सवाल: मामले में JPSC के तत्कालीन अध्यक्ष एल. ख्यांगते से भी CID कई दौर में पूछताछ कर चुकी है। जांच में उनके कार्यकाल के दौरान परीक्षा संचालन और अधिकारियों को दी गई जिम्मेदारियों को भी खंगाला जा रहा है। हालांकि किसी भी आरोप को अंतिम रूप से सही मानने से पहले जांच और न्यायिक प्रक्रिया पूरी होना जरूरी है।

OMR जांच के लिए अभ्यर्थियों से मांगी गई कॉपी: कथित परीक्षा अनियमितताओं की जांच को आगे बढ़ाते हुए CID ने 14वीं संयुक्त असैनिक सेवा प्रतियोगिता परीक्षा-2025 की प्रारंभिक परीक्षा में सफल अभ्यर्थियों से उनकी OMR शीट की कार्बन कॉपी उपलब्ध कराने को कहा था। इसका उद्देश्य परीक्षा में सामने आए आरोपों और वास्तविक OMR रिकॉर्ड के बीच मिलान करना था।

हजारों अभ्यर्थियों के भविष्य पर असर: JPSC विवाद ने राज्य के हजारों अभ्यर्थियों की चिंता बढ़ा दी है। परीक्षा प्रक्रिया की पारदर्शिता, मेरिट लिस्ट और OMR से जुड़े सवालों के कारण छात्रों में आक्रोश है। इसी बीच सरकार और जांच एजेंसियों पर निष्पक्ष जांच कर दोषियों के खिलाफ कार्रवाई करने तथा प्रभावित अभ्यर्थियों के हितों की रक्षा करने का दबाव बढ़ता जा रहा है।

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