November 4, 2026

JPSC के पूर्व अध्यक्ष एल. खियांग्ते और तत्कालीन उप परीक्षा नियंत्रक श्वेता गुप्ता समेत 12 पर आरोप पत्र दाखिल

file_00000000d25c81f49721c1520a5a0d83

सर्च न्यूज: सच के साथ: झारखंड लोक सेवा आयोग (JPSC) की भर्ती परीक्षाओं में हुई कथित धांधली और मेधा घोटाले के मामले में राज्य की अपराध अनुसंधान शाखा (CID) ने अदालत में अपनी पहली चार्जशीट दाखिल कर दी है. इस हाई-प्रोफाइल घोटाले में जेपीएससी के पूर्व अध्यक्ष एल. खियांग्ते, पूर्व उप परीक्षा नियंत्रक श्वेता कुमारी गुप्ता और परीक्षा संचालन करने वाली लखनऊ की आउटसोर्सिंग एजेंसी मेसर्स टीएसआर डेटा प्रोसेसिंग प्राइवेट लिमिटेड (TDPL) के मार्केटिंग मैनेजर अभय कुमार तिवारी और निदेशक रामवीर सिंह समेत कुल 12 लोगों को नामजद आरोपी बनाया गया है. सीआईडी ने जांच के 90 दिनों की निर्धारित समय-सीमा के भीतर यह चार्जशीट दाखिल की है, जिसके कारण आरोपियों को मिलने वाली डिफॉल्ट बेल (जमानत) की संभावना भी अब पूरी तरह समाप्त हो गई है.सीआईडी की तकनीकी और फोरेंसिक जांच में इस परीक्षा घोटाले को लेकर कई चौंकाने वाले और पुख्ता सबूत मिले हैं.

जांच रिपोर्ट के अनुसार, 14वीं सिविल सेवा परीक्षा के दौरान ओएमआर (OMR) शीट के साथ जानबूझकर बड़े पैमाने पर हेरफेर किया गया था. कई अयोग्य अभ्यर्थियों की ओएमआर शीट को परीक्षा के दौरान खाली छुड़वा दिया गया था, जिसे बाद में बैकएंड सर्वर और स्कैनिंग प्रक्रिया को प्रभावित कर अवैध रूप से भरा गया. इसके अलावा, आधिकारिक तौर पर जारी होने से पहले ही मुख्य परीक्षा की गोपनीय आंसर-की (उत्तर-कुंजी) को तत्कालीन उप परीक्षा नियंत्रक श्वेता गुप्ता द्वारा व्हाट्सएप के जरिए एजेंसी के कर्मचारियों को लीक कर दिया गया था.

इस सुनियोजित आपराधिक सिंडिकेट के जरिए मेधावी छात्रों के भविष्य से खिलवाड़ करते हुए अयोग्य अभ्यर्थियों से भारी रकम की अवैध वसूली की जा रही थी. सीआईडी की छानबीन में यह खुलासा हुआ है कि अभ्यर्थियों को प्रारंभिक परीक्षा पास कराने के लिए 5 लाख रुपये और मुख्य परीक्षा तथा अंतिम चयन (इंटरव्यू) के नाम पर 10 से 25 लाख रुपये (और कुछ मामलों में 80 लाख से 1 करोड़ रुपये तक) की मांग की जाती थी. सुरक्षा के तौर पर अभ्यर्थियों के असली शैक्षणिक दस्तावेज और ब्लैंक चेक भी जमा करा लिए जाते थे. इस पूरे घोटाले में वित्तीय लेन-देन, रिश्वतखोरी और डिजिटल साक्ष्यों को मिटाने की कोशिशों के तहत भारतीय न्याय संहिता (BNS) और झारखंड प्रतियोगिता परीक्षा अधिनियम 2023 की सख्त धाराओं के तहत कार्रवाई की गई है, जिसकी पहली आधिकारिक न्यायिक सुनवाई 26 अक्टूबर से शुरू होने की संभावना है.

You may have missed