November 3, 2026

झारखंड डीजीपी नियुक्ति विवाद: सुप्रीम कोर्ट पहुंची केंद्र सरकार, राज्य की नियमावली पर उठाए सवाल

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सर्च न्यूज: सच के साथ: झारखंड में पुलिस महानिदेशक (DGP) की नियुक्ति को लेकर चल रहा विवाद एक बार फिर देश की सर्वोच्च अदालत की चौखट पर पहुंच गया है। केंद्र सरकार ने बुधवार को सुप्रीम कोर्ट में एक विशेष अर्जी दाखिल कर झारखंड सरकार द्वारा वर्ष 2025 में बनाई गई डीजीपी नियुक्ति नियमावली को सीधे तौर पर चुनौती दी है। सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने चीफ जस्टिस सूर्यकांत, जस्टिस जोयमाल्या बागची और जस्टिस वी मोहना की पीठ के समक्ष इस मामले का विशेष रूप से उल्लेख किया। केंद्र का मुख्य आरोप है कि राज्य सरकार ने बिना सर्वोच्च न्यायालय की अनुमति के यह नई नियमावली अधिसूचित की, जो सीधे तौर पर कोर्ट के स्थापित कानूनी दिशा-निर्देशों का खुला उल्लंघन है।तदाशा मिश्रा की नियुक्ति पर खड़े हुए सवाल

इस विवाद की मुख्य कड़ी वरिष्ठ आईपीएस अधिकारी तदाशा मिश्रा की नियुक्ति से जुड़ी हुई है, जिन्हें झारखंड सरकार ने 30 दिसंबर 2025 को राज्य का नया पुलिस मुखिया नियुक्त किया था। दिलचस्प बात यह है कि तदाशा मिश्रा अगले ही दिन यानी 31 दिसंबर को सेवानिवृत्त होने वाली थीं। केंद्र सरकार ने इसे कानून का मज़ाक बताते हुए अदालत को सूचित किया कि राज्य सरकार ने अपनी नियमावली में रातों-रात संशोधन किया ताकि ‘छह महीने की अनिवार्य शेष सेवा’ वाली शर्त को हटाया जा सके। इस प्रकार महज एक दिन की सेवा शेष होने के बावजूद उन्हें पद पर बैठाकर अप्रत्यक्ष रूप से दो साल का सेवा विस्तार दे दिया गया, जो सुप्रीम कोर्ट के ‘प्रकाश सिंह मामले’ में दिए गए ऐतिहासिक फैसले की मूल भावना के सर्वथा विपरीत है।सुप्रीम कोर्ट ने राज्य सरकार और डीजीपी से मांगा जवाबकेंद्र की इस तीखी आपत्ति के बाद सुप्रीम कोर्ट ने मामले की गंभीरता को स्वीकार करते हुए झारखंड की मौजूदा डीजीपी तदाशा मिश्रा को नोटिस जारी कर इस पूरे विषय पर अपना पक्ष रखने को कहा है। अदालत ने प्रथम दृष्टया माना है कि राज्य सरकार द्वारा बनाए गए नियम पूर्व में दिए गए न्यायिक आदेशों को दरकिनार करने जैसे प्रतीत होते हैं। मामले की तात्कालिकता को देखते हुए देश के मुख्य न्यायाधीश की अध्यक्षता वाली पीठ ने इस याचिका पर त्वरित सुनवाई करने पर सहमति जताई है, जिसके बाद अब झारखंड की पुलिस व्यवस्था और उसकी चयन नियमावली के भविष्य का फैसला पूरी तरह से अदालत के अंतिम निर्णय पर निर्भर करेगा।

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