September 5, 2026

India Rejects Indus Waters Arbitration Award, Calls Court ‘Illegal’भारत ने ठुकराया Indus Waters Treaty पर Arbitration Award, कोर्ट के अधिकार क्षेत्र पर उठाए सवाल

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सर्च न्यूज: सच के साथ: नई दिल्ली: भारत ने सिंधु जल संधि (Indus Waters Treaty) को लेकर हेग स्थित Court of Arbitration के ताजा अवॉर्ड को सख्ती से खारिज कर दिया है। विदेश मंत्रालय ने कोर्ट को “अवैध रूप से गठित” बताते हुए कहा कि भारत ने इस निकाय की वैधता और अधिकार क्षेत्र को कभी स्वीकार नहीं किया है। भारत के मुताबिक, कोर्ट की ओर से जारी किसी भी pronouncement का भारत के फैसलों पर कोई प्रभाव नहीं पड़ेगा।

विदेश मंत्रालय के अनुसार, Court of Arbitration का गठन सिंधु जल संधि की शर्तों के विपरीत हुआ है। इसी वजह से भारत ने इस प्रक्रिया में हिस्सा नहीं लिया और पहले भी इस कोर्ट के फैसलों को मानने से इनकार किया है। मंत्रालय ने स्पष्ट किया कि कोर्ट को भारत के संप्रभु निर्णयों, खासकर भारत में चल रही जल एवं जलविद्युत परियोजनाओं से जुड़े फैसलों पर आदेश देने का अधिकार नहीं है।

भारत ने यह भी दोहराया है कि Indus Waters Treaty को फिलहाल ‘abeyance’ में रखने का उसका फैसला बरकरार है। यानी भारत के रुख में कोई बदलाव नहीं आया है। दूसरी ओर, Court of Arbitration ने अपने फैसले में संधि को प्रभावी मानते हुए भारत की कुछ गतिविधियों पर संधि के दायित्व लागू होने की बात कही है।

यह विवाद भारत और पाकिस्तान के बीच लंबे समय से चले आ रहे सिंधु नदी जल बंटवारे के मतभेद से जुड़ा है। ताजा घटनाक्रम से दोनों देशों के बीच जल संसाधनों और जम्मू-कश्मीर की जलविद्युत परियोजनाओं को लेकर कानूनी एवं कूटनीतिक तनाव और बढ़ सकता है। भारत का स्पष्ट रुख है कि जिस Court of Arbitration को उसने मान्यता ही नहीं दी, उसके फैसले भारत के लिए बाध्यकारी नहीं हैं।

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