गोवा में केजरीवाल का बड़ा सियासी दांव, GFP के साथ बनाया ‘गोवा फर्स्ट’ गठबंधन
सर्च न्यूज: सच के साथ: पणजी। गोवा की राजनीति में आगामी विधानसभा चुनाव से पहले बड़ा सियासी घटनाक्रम सामने आया है। आम आदमी पार्टी (AAP) के राष्ट्रीय संयोजक अरविंद केजरीवाल ने गोवा फॉरवर्ड पार्टी (GFP) के साथ गठबंधन का ऐलान किया है। दोनों दलों ने अपने गठबंधन को ‘गोवा फर्स्ट’ नाम दिया है। यह गठबंधन 2027 के गोवा विधानसभा चुनाव में बीजेपी और कांग्रेस के अलावा एक राजनीतिक विकल्प के तौर पर मैदान में उतरने की तैयारी कर रहा है।
गठबंधन की घोषणा के दौरान अरविंद केजरीवाल ने बीजेपी और कांग्रेस पर भी हमला बोला। उन्होंने आरोप लगाया कि गोवा में दोनों प्रमुख पार्टियों के बीच राजनीतिक मिलीभगत जैसी स्थिति बनी हुई है और जनता को बार-बार निराशा का सामना करना पड़ा है।केजरीवाल ने दावा किया कि गोवा फर्स्ट गठबंधन अपने दम पर सरकार बनाने की दिशा में आगे बढ़ेगा। उन्होंने यह भी कहा कि गोवा के मतदाताओं को अब एक नए विकल्प पर विचार करने का अवसर मिलेगा।
AAP और GFP के बीच गठबंधन की चर्चा पिछले कुछ समय से चल रही थी। गोवा फॉरवर्ड पार्टी पहले कांग्रेस के साथ संभावित चुनावी गठबंधन को लेकर बातचीत कर रही थी। हालांकि, दोनों दलों के बीच सहमति नहीं बन सकी।रिपोर्टों के अनुसार, GFP ने कांग्रेस के साथ बातचीत में दलबदल से जुड़े सवालों और गठबंधन को लेकर स्पष्टता की कमी पर आपत्ति जताई थी। इसके बाद AAP और GFP ने अलग मंच बनाने की दिशा में कदम बढ़ाया।
गोवा विधानसभा में कुल 40 सीटें हैं। सरकार बनाने के लिए किसी पार्टी या गठबंधन को कम से कम 21 सीटों का बहुमत हासिल करना होता है। 2022 के विधानसभा चुनाव में बीजेपी ने 20 सीटें जीती थीं, जबकि कांग्रेस ने 11 सीटों पर जीत दर्ज की थी। बाद में कांग्रेस के कई विधायक बीजेपी में शामिल हो गए, जिससे राज्य की राजनीतिक स्थिति में बदलाव आया। वर्तमान विधानसभा की आधिकारिक सूची में गोवा फॉरवर्ड पार्टी के विजय सरदेसाई और आम आदमी पार्टी के वेन्जी वीगास तथा क्रूज सिल्वा के नाम दर्ज हैं। इससे स्पष्ट है कि दोनों दलों के पास विधानसभा में पहले से प्रतिनिधित्व मौजूद है।
‘गोवा फर्स्ट’ गठबंधन के सामने सबसे बड़ी चुनौती बीजेपी और कांग्रेस के बीच अपनी राजनीतिक जगह बनाना होगी। AAP और GFP का दावा है कि वे गोवा के मतदाताओं को एक नया विकल्प देंगे और राज्य में अपने दम पर सरकार बनाने की कोशिश करेंगे।हालांकि, गठबंधन के सीट बंटवारे, उम्मीदवारों की सूची और चुनावी रणनीति से जुड़ी पूरी जानकारी अभी सामने नहीं आई है। चुनाव में इसका वास्तविक असर मतदाताओं के समर्थन और दोनों दलों के संगठनात्मक प्रदर्शन पर निर्भर करेगा।
