November 3, 2026

छात्राओं के साथ कथित बदसलूकी पर भड़के राहुल गांधी, दिल्ली पुलिस की कार्रवाई पर उठाए सवाल

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सर्च न्यूज: सच के साथ: नई दिल्ली, 17 अक्टूबर 2026। लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी ने दिल्ली में प्रदर्शन के दौरान छात्राओं और महिला प्रदर्शनकारियों के साथ कथित दुर्व्यवहार को लेकर दिल्ली पुलिस की कार्रवाई पर सवाल उठाए हैं। उन्होंने सोशल मीडिया पर पोस्ट साझा कर आरोप लगाया कि लोकतांत्रिक अधिकारों के लिए आवाज उठाने वाली महिलाओं को डराने और उनकी आवाज दबाने की कोशिश की जा रही है। उन्होंने इस मामले में जवाबदेही तय करने की मांग की है।

यह मामला मुख्य निर्वाचन आयुक्त ज्ञानेश कुमार के खिलाफ हुए विरोध प्रदर्शन से जुड़ा है। 13 और 14 अक्टूबर को दिल्ली में कांग्रेस की छात्र इकाई नेशनल स्टूडेंट्स यूनियन ऑफ इंडिया (NSUI) के कार्यकर्ताओं ने प्रदर्शन किया था। प्रदर्शनकारियों ने आरोप लगाया कि हिरासत में लिए जाने के दौरान पुलिसकर्मियों ने उनके साथ मारपीट और दुर्व्यवहार किया।

NSUI की महिला कार्यकर्ताओं ने भी शारीरिक हमले के आरोप लगाए। एक महिला प्रदर्शनकारी ने दावा किया कि हिरासत के दौरान एक महिला पुलिसकर्मी ने उन्हें थप्पड़ मारा, जिससे उनके चेहरे पर खरोंचें आईं।राहुल गांधी ने 14 अक्टूबर को कथित पुलिस हिंसा से प्रभावित NSUI कार्यकर्ताओं से मुलाकात कर पुलिस की कार्रवाई की आलोचना की थी। इसके बाद 17 अक्टूबर को उन्होंने सोशल मीडिया के माध्यम से महिला प्रदर्शनकारियों के साथ कथित दुर्व्यवहार का मुद्दा दोबारा उठाया। उन्होंने आरोप लगाया कि महिलाओं और छात्राओं के साथ इस तरह का व्यवहार लोकतांत्रिक मूल्यों के खिलाफ है।

मामले में दिल्ली पुलिस ने बस में हुई कथित मारपीट को लेकर NSUI की महिला कार्यकर्ताओं के खिलाफ भी प्राथमिकी (FIR) दर्ज की है। दूसरी ओर, NSUI कार्यकर्ताओं ने पुलिसकर्मियों के खिलाफ कार्रवाई की मांग की है। NSUI कार्यकर्ता अथिरा सी. से जुड़े कथित पुलिस हमले के मामले में केरल पुलिस द्वारा जीरो FIR दर्ज किए जाने की भी खबर है।

मामले में निष्पक्ष जांच और जवाबदेही का सवाल: महिला प्रदर्शनकारियों द्वारा लगाए गए आरोपों ने पुलिस की कार्यप्रणाली और प्रदर्शनकारियों के अधिकारों को लेकर सवाल खड़े किए हैं। हालांकि, कथित दुर्व्यवहार से जुड़े सभी आरोपों की स्वतंत्र रूप से पुष्टि होना अभी बाकी है। मामले की निष्पक्ष जांच, संबंधित पक्षों के बयान और उपलब्ध साक्ष्यों के आधार पर ही जिम्मेदारी तय की जा सकती है।

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