November 3, 2026

शारदीय नवरात्रि आज से शुरू, मां शैलपुत्री की आराधना के साथ नौ दिनों तक गूंजेगा मां दुर्गा का जयकारा

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नौ दिनों तक होगी मां दुर्गा के नौ स्वरूपों की पूजा-अर्चना, घरों और मंदिरों में घटस्थापना के साथ शुरू हुआ शक्ति उपासना का पर्व

नई दिल्ली, 11 अक्टूबर 2026। आस्था, भक्ति और शक्ति की उपासना का पावन पर्व शारदीय नवरात्रि आज, रविवार से शुरू हो गया है। आश्विन मास के शुक्ल पक्ष की प्रतिपदा तिथि से शुरू होने वाले इस नौ दिवसीय पर्व को लेकर श्रद्धालुओं में उत्साह का माहौल है। नवरात्रि के पहले दिन मां दुर्गा के प्रथम स्वरूप मां शैलपुत्री की पूजा-अर्चना की जाती है। इसके साथ ही घरों और मंदिरों में कलश स्थापना कर भक्त मां दुर्गा का आह्वान करते हैं

नवरात्रि के पहले दिन मां शैलपुत्री की पूजा क्यों होती है?

धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, मां शैलपुत्री मां दुर्गा का प्रथम स्वरूप हैं। पर्वतराज हिमालय के घर पुत्री के रूप में जन्म लेने के कारण उन्हें शैलपुत्री कहा जाता है। नवरात्रि के पहले दिन उनकी पूजा से नौ दिवसीय दुर्गा उपासना का शुभारंभ होता है। मां शैलपुत्री को शक्ति, धैर्य, दृढ़ संकल्प और प्रकृति का प्रतीक माना जाता है। उनके दाहिने हाथ में त्रिशूल और बाएं हाथ में कमल सुशोभित है, जबकि वे वृषभ पर सवार रहती हैं। धार्मिक विश्वास है कि सच्चे मन से मां शैलपुत्री की आराधना करने से जीवन में सकारात्मकता, आत्मबल और स्थिरता का संचार होता है। मां शैलपुत्री की पूजा का संदेश है कि जीवन की हर चुनौती का सामना दृढ़ विश्वास, धैर्य और साहस के साथ करना चाहिए।

घटस्थापना के साथ शुरू हुई पूजा-अर्चना: नवरात्रि के पहले दिन घटस्थापना का विशेष धार्मिक महत्व माना जाता है। श्रद्धालु विधि-विधान से कलश स्थापित कर अखंड ज्योति प्रज्वलित करते हैं और मां दुर्गा से परिवार की सुख-समृद्धि, स्वास्थ्य और खुशहाली की कामना करते हैं। कई घरों में नौ दिनों तक व्रत, दुर्गा सप्तशती का पाठ, भजन-कीर्तन और विशेष पूजा-अर्चना की जाती है।धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, मां शैलपुत्री शक्ति, दृढ़ता और संकल्प की प्रतीक हैं। उनकी आराधना के साथ नवरात्रि का शुभारंभ किया जाता है।

नौ दिनों तक होगी नौ स्वरूपों की आराधना: शारदीय नवरात्रि के दौरान मां दुर्गा के नौ स्वरूपों की पूजा की जाती है। प्रत्येक दिन देवी के एक स्वरूप को समर्पित होता है। इस दौरान श्रद्धालु उपवास रखते हैं, मंदिरों में दर्शन करते हैं और धार्मिक अनुष्ठानों में भाग लेते हैं।नवरात्रि के अवसर पर विभिन्न स्थानों पर पूजा पंडालों की सजावट, भजन-कीर्तन और सांस्कृतिक कार्यक्रमों का आयोजन भी किया जाता है। यह पर्व धार्मिक आस्था के साथ-साथ सामाजिक और सांस्कृतिक एकता का संदेश भी देता है।

सकारात्मकता और शक्ति का संदेश देता है पर्व: शारदीय नवरात्रि को बुराई पर अच्छाई और अधर्म पर धर्म की विजय का प्रतीक माना जाता है। यह पर्व लोगों को आत्मसंयम, सेवा, सद्भाव और सकारात्मक सोच अपनाने की प्रेरणा देता है। श्रद्धालु मां दुर्गा की आराधना कर अपने जीवन में सुख, शांति और समृद्धि की कामना करते हैं।नवरात्रि का समापन महानवमी के बाद विजयादशमी के पर्व के साथ होगा। इस वर्ष विजयादशमी 20 अक्टूबर को मनाई जाएगी।

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