September 4, 2026

सेना प्रमुख जनरल धीरज सेठ ने किया सिलीगुड़ी कॉरिडोर का दौरा, जानिए क्यों भारत के लिए जरूरी है ‘चिकन नेक’

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सर्च न्यूज: सच के साथ: भारतीय थल सेना प्रमुख जनरल धीरज सेठ ने पश्चिम बंगाल के दार्जिलिंग जिले में स्थित सुकना में पूर्वी कमान (Trishakti Corps) के सैन्य ठिकानों का दौरा किया। इस उच्चस्तरीय दौरे के दौरान सेना प्रमुख ने वरिष्ठ सैन्य कमांडरों के साथ एक विशेष समीक्षा बैठक की, जिसमें त्रिशक्ति कोर के जीओसी (GOC) ने उन्हें क्षेत्रीय सुरक्षा और सीमाओं की वर्तमान स्थिति से अवगत कराया। जनरल सेठ ने इस संवेदनशील क्षेत्र में तैनात सैनिकों की परिचालन तैयारियों, बुनियादी ढांचे के विकास और आधुनिक सैन्य प्रौद्योगिकियों के उपयोग की गहन समीक्षा की। इसके साथ ही उन्होंने पूर्वोत्तर की सुरक्षा के लिए महत्वपूर्ण ‘विजय’ विजन को भी साझा किया

भारत के लिए क्यों बेहद जरूरी है ‘चिकन नेक‘सिलीगुड़ी कॉरिडोर, जिसे भू-राजनीतिक और सैन्य भाषा में ‘चिकन नेक’ कहा जाता है, भारत का सबसे संवेदनशील रणनीतिक चोकपॉइंट है। यह संकरा भू-भाग मात्र 20 से 22 किलोमीटर चौड़ा है, जो नेपाल, भूटान और बांग्लादेश की सीमाओं से घिरा हुआ है। सबसे महत्वपूर्ण बात यह है कि यह कॉरिडोर मुख्य भूमि भारत को पूर्वोत्तर के आठ राज्यों (Seven Sisters और सिक्किम) से जोड़ने वाला एकमात्र सड़क और रेल मार्ग है। यदि किसी युद्ध या संघर्ष की स्थिति में दुश्मन इस संकरे हिस्से पर नियंत्रण कर लेता है, तो पूर्वोत्तर भारत पूरी तरह से देश के शेष हिस्से से कट जाएगा, जिससे लगभग 5 करोड़ की आबादी और भारतीय सेना की सप्लाई लाइन पूरी तरह बाधित हो सकती है।

बदलते भू-राजनीतिक समीकरण और भारत का अभेद्य सुरक्षा कवचहाल के दिनों में बांग्लादेश में हुए सत्ता परिवर्तन और वहां पाकिस्तान व चीन की बढ़ती सैन्य गतिविधियों को देखते हुए खुफिया एजेंसियों ने इस क्षेत्र में खतरे को लेकर अलर्ट जारी किया है। चीन द्वारा डोकलाम त्रिजंक्शन के पास सड़क निर्माण और बांग्लादेश-पाकिस्तान की बढ़ती नजदीकियों के कारण भारत ने अपनी ‘ज़ीरो रिस्क पॉलिसी’ के तहत सिलीगुड़ी कॉरिडोर के चारों ओर 360-डिग्री सुरक्षा घेरा तैयार किया है। सुरक्षा को अभेद्य बनाने के लिए सेना ने पश्चिम बंगाल के चोपड़ा, बिहार के किशनगंज और असम में नए रणनीतिक सैन्य स्टेशन स्थापित किए हैं। इसके अलावा उन्नत ड्रोन नेटवर्क, डिजिटल वॉचटावर, सुदर्शन चक्र (S-400 मिसाइल प्रणाली) और राफेल लड़ाकू विमानों की तैनाती के जरिए इस जीवनरेखा को पूरी तरह सुरक्षित कर दिया गया है।

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