September 5, 2026

RBI:RBI का बड़ा फैसला: विदेशी मुद्रा स्वैप सुविधा 31 अगस्त को होगी बंद

1200-675-27195948-thumbnail-16x9-ssss

सर्च न्यूज: सच के साथ: मुंबई, 14 अगस्त 2026: भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) ने गैर-निवासी भारतीयों (NRIs) की विदेशी मुद्रा जमा यानी FCNR(B) Deposits से जुड़ी विशेष विदेशी मुद्रा (FX) स्वैप सुविधा को तय समय से पहले बंद करने का फैसला किया है। RBI ने इसकी अंतिम तारीख 30 सितंबर से घटाकर 31 अगस्त 2026 कर दी है। यह फैसला इस सुविधा के तहत उम्मीद से कहीं अधिक विदेशी मुद्रा आने के बाद लिया गया है।

52.3 अरब डॉलर से ज्यादा की विदेशी मुद्रा आई: RBI की इस विशेष व्यवस्था के तहत 13 अगस्त तक FCNR(B) जमा के माध्यम से करीब 52.3 अरब डॉलर की विदेशी मुद्रा जुटाई जा चुकी थी। जून 2026 में शुरू की गई इस पहल का उद्देश्य बैंकों के जरिए विदेशी मुद्रा जुटाना, देश के विदेशी मुद्रा भंडार को मजबूत करना और रुपये पर पड़ रहे दबाव को कम करना था।

क्या है FX स्वैप सुविधा? इस व्यवस्था के तहत बैंक NRIs से विदेशी मुद्रा में जमा जुटाते हैं और RBI के साथ एक विशेष स्वैप करते हैं। इसके जरिए बैंकों को रुपये की तरलता मिलती है, जबकि विदेशी मुद्रा प्रणाली में आती है। RBI के अनुसार यह एक buy/sell foreign-exchange swap व्यवस्था है, जिसमें जमा की मूल राशि शामिल होती है, ब्याज नहीं।इस योजना के तहत नए या नवीनीकृत FCNR(B) जमा पर बैंकों को विदेशी मुद्रा जोखिम की हेजिंग के लिए रियायती स्वैप सुविधा उपलब्ध कराई गई थी। शुरुआत में यह सुविधा 30 सितंबर तक उपलब्ध रहने वाली थी, लेकिन मजबूत प्रतिक्रिया मिलने के कारण RBI ने इसे एक महीने पहले ही समाप्त करने का फैसला किया।

भारत के विदेशी मुद्रा भंडार पर असर: इस पहल से भारत को विदेशी मुद्रा का मजबूत प्रवाह मिला है। 7 अगस्त 2026 तक भारत का विदेशी मुद्रा भंडार बढ़कर करीब 707 अरब डॉलर पहुंच गया था। केवल एक सप्ताह में इसमें लगभग 14.1 अरब डॉलर की वृद्धि हुई। पिछले छह सप्ताह में विदेशी मुद्रा भंडार में करीब 40 अरब डॉलर की बढ़ोतरी दर्ज की गई है।

RBI ने सुविधा क्यों बंद की?जानकारों के मुताबिक, RBI का फैसला इस बात का संकेत है कि इस विशेष योजना के तहत पर्याप्त मात्रा में विदेशी मुद्रा आ चुकी है। इतनी मजबूत प्रतिक्रिया के बाद सुविधा को सितंबर तक जारी रखने की जरूरत कम हो गई। इससे RBI को विदेशी मुद्रा बाजार में तरलता और रुपये की स्थिरता को अधिक प्रभावी ढंग से प्रबंधित करने में मदद मिल सकती है।

You may have missed