Political row over Vande Mataram: ‘वंदे मातरम्’ को लेकर सियासी घमासान, BJP और कांग्रेस आमने-सामने
सर्च न्यूज: सच के साथ: नई दिल्ली, 16 अगस्त 2026: स्वतंत्रता दिवस के अवसर पर कांग्रेस मुख्यालय में आयोजित कार्यक्रम के दौरान ‘वंदे मातरम्’ के पूर्ण संस्करण के गायन को लेकर BJP और कांग्रेस के बीच नया राजनीतिक विवाद खड़ा हो गया है। BJP ने कांग्रेस की वरिष्ठ नेता सोनिया गांधी पर राष्ट्रगीत के पूर्ण गायन पर आपत्ति जताने का आरोप लगाया, जबकि कांग्रेस ने इस आरोप को खारिज करते हुए कहा कि सोनिया गांधी केवल पार्टी अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे के लिए कुर्सी की व्यवस्था करने की बात कर रही थीं।
कांग्रेस ने आरोपों को बताया गलत: कांग्रेस महासचिव जयराम रमेश ने BJP के आरोपों को खारिज किया। उनका कहना है कि सोनिया गांधी राष्ट्रगीत को रोकने की कोशिश नहीं कर रही थीं। उनके अनुसार, खरगे काफी देर से खड़े थे और सोनिया गांधी उनके लिए कुर्सी मांग रही थीं। कांग्रेस ने यह भी स्पष्ट किया कि 15 अगस्त के कार्यक्रम में ‘वंदे मातरम्’ का पूरा संस्करण वास्तव में गाया गया था।
पुराना इतिहास भी बना बहस का हिस्सा: कांग्रेस ने अपने पक्ष में 1937 के उस निर्णय का उल्लेख किया जिसमें कांग्रेस अधिवेशनों में ‘वंदे मातरम्’ के शुरुआती अंशों के इस्तेमाल की परंपरा का हवाला दिया जाता है। पार्टी का कहना है कि उस समय महात्मा गांधी, नेताजी सुभाष चंद्र बोस और अन्य नेताओं से विचार-विमर्श के बाद यह व्यवस्था अपनाई गई थी। हालांकि, कांग्रेस ने 15 अगस्त 2026 के अपने कार्यक्रम में पूर्ण संस्करण गाए जाने की बात कही है
पहले से चल रही थी ‘वंदे मातरम्’ पर बहस: यह विवाद ऐसे समय सामने आया है जब ‘वंदे मातरम्’ के गायन और उसके आधिकारिक प्रोटोकॉल को लेकर पहले से राजनीतिक बहस चल रही है। इस वर्ष स्वतंत्रता दिवस पर पहली बार लाल किले के कार्यक्रम में राष्ट्रगान से पहले ‘वंदे मातरम्’ का गायन किया गया। फिलहाल ‘वंदे मातरम्’ को लेकर BJP और कांग्रेस के बीच आरोप-प्रत्यारोप तेज हैं। विवाद ने एक बार फिर राष्ट्रगीत, राष्ट्रीय प्रतीकों और उनके सम्मान को लेकर राजनीतिक बहस को केंद्र में ला दिया है। हालांकि, सोनिया गांधी की मंशा को लेकर दोनों दलों के दावे अलग-अलग हैं, इसलिए इस विवाद में आरोप और प्रत्यारोप को तथ्य के रूप में नहीं, संबंधित दलों के दावे के रूप में देखना उचित है।
