November 3, 2026

नवरात्रि का छठा दिन आज: मां कात्यायनी की आराधना से मिलता है साहस और शक्ति, जानिए पूजा का महत्व और धार्मिक मान्यता

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16 अक्टूबर 2026। शारदीय नवरात्रि का आज छठा दिन है। इस पावन अवसर पर मां दुर्गा के छठे स्वरूप मां कात्यायनी की पूजा-अर्चना की जाती है। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, मां कात्यायनी शक्ति, साहस, पराक्रम और विजय की प्रतीक हैं। भक्त इस दिन विधि-विधान से मां की पूजा कर जीवन में सुख-समृद्धि, शांति और सकारात्मक ऊर्जा की कामना करते हैं। माना जाता है कि मां कात्यायनी अपने भक्तों को कठिन परिस्थितियों का सामना करने की शक्ति प्रदान करती हैं।

महर्षि कात्यायन की तपस्या से जुड़ी है मां के प्राकट्य की कथा: पौराणिक मान्यताओं के अनुसार, महर्षि कात्यायन ने मां भगवती को प्रसन्न करने के लिए कठोर तपस्या की थी। उनकी तपस्या से प्रसन्न होकर देवी ने उनके घर पुत्री के रूप में जन्म लिया। महर्षि कात्यायन की पुत्री होने के कारण देवी का नाम कात्यायनी पड़ा। मां कात्यायनी को देवी दुर्गा का योद्धा स्वरूप भी माना जाता है। धार्मिक कथाओं में उनका संबंध महिषासुर के संहार से जोड़ा जाता है। मां का यह स्वरूप बुराई पर अच्छाई की जीत और अन्याय के विरुद्ध खड़े होने की प्रेरणा देता है।

चार भुजाएं और सिंह है मां कात्यायनी का वाहन: धार्मिक चित्रण में मां कात्यायनी का स्वरूप अत्यंत तेजस्वी और दिव्य बताया गया है। उनकी चार भुजाएं हैं और उनका वाहन सिंह है। उनके हाथों में तलवार और कमल सुशोभित होते हैं, जबकि अन्य दो हाथ अभय और वरद मुद्रा में दर्शाए जाते हैं। तलवार शक्ति और नकारात्मकता के विनाश का प्रतीक है, वहीं कमल पवित्रता का संदेश देता है। मां की अभय मुद्रा भक्तों को निर्भय रहने का संदेश देती है। उनकी आराधना के माध्यम से श्रद्धालु साहस, आत्मविश्वास और दृढ़ संकल्प की प्रेरणा प्राप्त करते हैं।

विवाह संबंधी मनोकामनाओं के लिए भी होती है विशेष पूजा: मां कात्यायनी की पूजा का विशेष महत्व विवाह संबंधी मनोकामनाओं के संदर्भ में भी माना जाता है। धार्मिक मान्यता है कि योग्य जीवनसाथी की कामना करने वाले श्रद्धालु मां की आराधना करते हैं। पौराणिक परंपरा के अनुसार, भगवान श्रीकृष्ण को पति रूप में पाने की इच्छा से ब्रज की गोपियों ने मां कात्यायनी की पूजा की थी। इसी कारण मां की उपासना को वैवाहिक जीवन से जुड़ी कामनाओं के लिए विशेष माना जाता है। हालांकि, ये धार्मिक आस्थाएं और परंपरागत मान्यताएं हैं।

कैसे करें मां कात्यायनी की पूजा?नवरात्रि के छठे दिन सुबह स्नान के बाद स्वच्छ वस्त्र धारण कर मां कात्यायनी की प्रतिमा या तस्वीर के सामने दीप जलाकर पूजा की जाती है। भक्त मां को फूल, फल और अपनी श्रद्धा के अनुसार प्रसाद अर्पित करते हैं। इस दिन शहद का भोग लगाने की भी परंपरा प्रचलित है। मां के मंत्र “ॐ देवी कात्यायन्यै नमः” का जाप कर श्रद्धालु उनका आशीर्वाद मांगते हैं। इस वर्ष नवरात्रि के छठे दिन हरे रंग को भी विशेष रूप से जोड़ा गया है, जो प्रकृति, विकास, नई शुरुआत और सकारात्मकता का प्रतीक माना जाता है।

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