November 4, 2026

झारखंड राजनीति: आजसू (AJSU) का राजनीतिक सफर और बदलता सियासी परिदृश्य, विधायकों की संख्या सिमटकर रह गई केवल 1

file_00000000627c82108a3b9b7392569765

सर्च न्यूज: सच के साथ: झारखंड की क्षेत्रीय राजनीति में ऑल झारखंड स्टूडेंट्स यूनियन (AJSU Party) एक प्रमुख ताकत रही है, लेकिन हाल के वर्षों में पार्टी की राजनीतिक जमीन तेजी से खिसकी है। वर्ष 2014 के झारखंड विधानसभा चुनाव में आजसू ने भारतीय जनता पार्टी (BJP) के साथ गठबंधन में बेहतरीन प्रदर्शन करते हुए कुल 5 सीटों पर जीत दर्ज की थी। उस दौरान सुदेश महतो के नेतृत्व में पार्टी न केवल सरकार का हिस्सा बनी, बल्कि राज्य के नीतिगत फैसलों में भी उसकी अहम भूमिका रही। हालांकि, हालिया राजनीतिक घटनाक्रमों और चुनावी नतीजों के बाद पार्टी के विधायकों की संख्या सिमटकर केवल 1 रह गई है, जिसने इसके राजनीतिक वजूद पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं।

राजनीतिक विश्लेषकों के अनुसार, आजसू के इस चुनावी ग्राफ में गिरावट का मुख्य कारण सीटों के तालमेल को लेकर बढ़ता असंतोष और आंतरिक रणनीतिक विफलताएं हैं। वर्ष 2019 और उसके बाद के चुनावों में बीजेपी के साथ सीट शेयरिंग पर सहमति न बन पाना और अकेले चुनाव मैदान में उतरने का फैसला पार्टी के लिए आत्मघाती साबित हुआ। राष्ट्रीय दलों के बड़े जनाधार के सामने आजसू के कई मजबूत क्षेत्रीय क्षत्रप अपनी सीटें बचाने में नाकाम रहे। इसके अतिरिक्त, झारखंड मुक्ति मोर्चा (JMM) और कांग्रेस गठबंधन द्वारा स्थानीयता और आदिवासी-मूलवासी कार्ड को मजबूती से खेलने के कारण आजसू का पारंपरिक वोट बैंक भी अन्य दलों की ओर खिसक गया।

वर्तमान परिस्थितियों में आजसू पार्टी अपने अस्तित्व को बचाने के लिए नए सिरे से संघर्ष कर रही है। पार्टी सुप्रीमो सुदेश महतो लगातार संगठनात्मक बैठकें कर कार्यकर्ताओं में नया जोश भरने का प्रयास कर रहे हैं। झारखंड की जनता के बीच अपनी खोई हुई साख को वापस पाने के लिए पार्टी अब स्थानीय मुद्दों, युवाओं के रोजगार और जन-सरोकारों से जुड़े आंदोलनों को धार देने की रणनीति पर काम कर रही है। राजनीतिक हलकों में यह चर्चा भी जोरों पर है कि आगामी चुनावों में पार्टी को अपनी प्रासंगिकता बनाए रखने के लिए फिर से किसी बड़े गठबंधन का सहारा लेना पड़ सकता है।

You may have missed