September 5, 2026

Jharkhand:झारखंड SIR पर घमासान: वोटर हटाने के फॉर्म को लेकर BJP एजेंट और BLO आमने-सामने

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सर्च न्यूज: सच के साथ: गोड्डा में वोटर लिस्ट से नाम हटाने के लिए बड़ी संख्या में Form 7 जमा कराने का मामला सामने आने के बाद विवाद गहरा गया है। BLO ने कई आवेदनों की प्रक्रिया और सत्यता पर सवाल उठाए, जबकि BJP ने इसे अपने एजेंटों की वैध आपत्ति बताया है।झारखंड में चल रही Special Intensive Revision (SIR) के दौरान गोड्डा जिले में मतदाता सूची से नाम हटाने को लेकर राजनीतिक और प्रशासनिक विवाद सामने आया है। द इंडियन एक्सप्रेस की जांच के मुताबिक, गोड्डा के कम से कम चार बूथों पर BJP के Booth Level Agents (BLA) की ओर से बड़ी संख्या में Form 7 के जरिए मतदाताओं के नाम हटाने की आपत्तियां सामने आईं। रिपोर्ट के अनुसार, इनमें बड़ी संख्या में नाम अल्पसंख्यक समुदाय के मतदाताओं के थे।

25 से लेकर 75 तक Form 7 जमा कराने का दावा: महेशटिकरी गांव के बूथ नंबर 9 में एक BJP BLA द्वारा करीब 25 मतदाताओं के खिलाफ Form 7 दिए जाने की बात सामने आई। वहीं, पड़ोसी बूथ पर करीब 75 Form 7 जमा कराने की कोशिश की गई। संबंधित BLO ने इन फॉर्मों की प्रक्रिया और स्रोत को लेकर सवाल उठाए। रिपोर्ट के अनुसार, 75 फॉर्म वाले मामले में संबंधित BLA ने बाद में फॉर्म जला दिए। BLA ने द इंडियन एक्सप्रेस से कहा कि उसे फॉर्म के उद्देश्य की पूरी जानकारी नहीं थी और उसे ये फॉर्म BJP कार्यकर्ताओं की ओर से BLO के पास जमा कराने के लिए दिए गए थे।

BLO ने क्यों जताई आपत्ति? BLO के मुताबिक, कुछ फॉर्म आधिकारिक रूप से उपलब्ध कराए गए फॉर्मों से अलग थे। अधिकारियों ने यह भी कहा कि कई मतदाताओं के नाम 2003 की मतदाता सूची में पहले से दर्ज थे। प्रशासन ने ऐसे मामलों में सीधे नाम हटाने के बजाय जांच और फील्ड वेरिफिकेशन की जरूरत बताई। बासंतराय के BDO एवं Electoral Registration Officer (ERO) श्रीमन मरांडी के अनुसार, महेशटिकरी, पचुआ किता, लोचनी और बाघाकोल—इन चार बूथों से शिकायतें मिलीं। उन्होंने कहा कि मामले में फील्ड वेरिफिकेशन के बाद जांच रिपोर्ट तैयार की जाएगी

Form 7 आखिर होता क्या है? चुनाव आयोग की प्रक्रिया के तहत Form 7 का इस्तेमाल मतदाता सूची में किसी नाम को हटाने के लिए आपत्ति दर्ज करने में किया जा सकता है। इसके आधारों में व्यक्ति का मृत होना, संबंधित क्षेत्र में सामान्य रूप से निवास न करना या अन्य निर्धारित अयोग्यताएं शामिल हो सकती हैं। हालांकि, केवल Form 7 दाखिल हो जाने से किसी मतदाता का नाम स्वतः नहीं हटता। नियमों के अनुसार, आपत्ति मिलने के बाद संबंधित Electoral Registration Officer को जांच करनी होती है, प्रभावित मतदाता को जवाब देने का अवसर देना होता है और उसके बाद ही नाम हटाने का आदेश दिया जा सकता है। BLO को भी जमीनी स्तर पर सत्यापन की प्रक्रिया में भूमिका निभानी होती है।

BJP का क्या कहना है? BJP ने BLO द्वारा फॉर्म स्वीकार न किए जाने पर आपत्ति जताई है। पार्टी का कहना है कि यदि किसी व्यक्ति का नाम एक से अधिक स्थानों पर दर्ज है या मतदाता सूची में कोई वास्तविक विसंगति है, तो उसके खिलाफ Form 7 के माध्यम से आपत्ति उठाना उसके बूथ एजेंट की जिम्मेदारी का हिस्सा है। BJP के पूर्व गोड्डा विधायक अमित कुमार मंडल ने कहा कि Form 7 जमा करने की संख्या की कोई निर्धारित सीमा नहीं है और आपत्तियों की जांच करना चुनाव अधिकारियों की जिम्मेदारी है

मामला राजनीतिक विवाद में बदला: इस पूरे प्रकरण ने BJP और राज्य की JMM-कांग्रेस गठबंधन सरकार के बीच राजनीतिक टकराव को भी बढ़ा दिया है। सत्तारूढ़ गठबंधन से जुड़े नेताओं ने आरोप लगाया है कि Form 7 के जरिए मुस्लिम मतदाताओं को निशाना बनाया जा रहा है। वहीं BJP ने इन आरोपों को खारिज करते हुए मतदाता सूची की विसंगतियों को दूर करने की अपनी प्रक्रिया का हिस्सा बताया है। महत्वपूर्ण बात यह है कि अभी इन आरोपों पर अंतिम प्रशासनिक निष्कर्ष सामने नहीं आया है। अधिकारियों ने शिकायतों की जांच और प्रभावित मतदाताओं के फील्ड वेरिफिकेशन की बात कही है। इसलिए किसी भी मतदाता का नाम केवल आपत्ति दाखिल होने से अंतिम रूप से मतदाता सूची से हट गया है—ऐसा मानना सही नहीं होगा

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