सर्च न्यूज: सच के साथ: रांची: झारखंड विधानसभा का मानसून सत्र गुरुवार से शुरू हो गया। यह सत्र राजनीतिक दृष्टि से काफी महत्वपूर्ण माना जा रहा है, क्योंकि विपक्ष ने JPSC और JSSC की विभिन्न प्रतियोगी परीक्षाओं में कथित अनियमितताओं, पेपर लीक, बेरोजगारी, कानून-व्यवस्था और जनहित से जुड़े कई मुद्दों पर सरकार को घेरने की रणनीति बनाई है। सत्र के दौरान सत्ता पक्ष और विपक्ष के बीच तीखी बहस होने की संभावना है।
विपक्षी दलों ने स्पष्ट किया है कि वे JSSC-CGL सहित अन्य भर्ती परीक्षाओं में सामने आए विवादों को प्रमुखता से उठाएंगे। उनका आरोप है कि भर्ती प्रक्रियाओं में पारदर्शिता की कमी के कारण लाखों युवाओं का भविष्य प्रभावित हुआ है। विपक्ष ने मांग की है कि विवादित परीक्षाओं की निष्पक्ष जांच कराई जाए और दोषियों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई सुनिश्चित की जाए।मानसून सत्र के पहले दिन विधानसभा परिसर में विपक्षी विधायकों ने प्रतियोगी परीक्षाओं में कथित गड़बड़ियों के विरोध में प्रदर्शन भी किया। उन्होंने हाथों में तख्तियां लेकर सरकार के खिलाफ नारेबाजी की और युवाओं के हितों की रक्षा के लिए ठोस कदम उठाने की मांग की। विपक्ष का कहना है कि राज्य के बेरोजगार युवा लंबे समय से नियुक्तियों का इंतजार कर रहे हैं, लेकिन भर्ती प्रक्रिया में लगातार विवाद सामने आने से उनका विश्वास कमजोर हुआ है।वहीं, सरकार का कहना है कि भर्ती प्रक्रियाओं को पारदर्शी और निष्पक्ष बनाने के लिए आवश्यक कदम उठाए जा रहे हैं। सरकार ने भरोसा दिलाया है कि यदि किसी भी परीक्षा में अनियमितता के प्रमाण मिलते हैं तो संबंधित दोषियों के खिलाफ कानून के अनुसार कार्रवाई की जाएगी।प्रतियोगी परीक्षाओं के अलावा मानसून सत्र में राज्य की विकास योजनाओं, वित्तीय मामलों, सड़क, शिक्षा, स्वास्थ्य, सिंचाई, बिजली, कानून-व्यवस्था और जनकल्याण से जुड़े अन्य विषयों पर भी चर्चा होने की संभावना है। विभिन्न विभागों से जुड़े प्रश्नों के माध्यम से सरकार से जवाब मांगा जाएगा तथा कई विधेयक और सरकारी कार्य भी सदन में प्रस्तुत किए जा सकते हैं।राजनीतिक जानकारों का मानना है कि प्रतियोगी परीक्षाओं में कथित अनियमितताओं का मुद्दा इस मानसून सत्र का सबसे प्रमुख और संवेदनशील विषय रहेगा। ऐसे में सदन के भीतर और बाहर दोनों जगह इस मुद्दे पर सत्ता पक्ष और विपक्ष के बीच तीखी नोकझोंक देखने को मिल सकती है।