September 5, 2026

Jharkhand High Court:झारखंड हाईकोर्ट का बड़ा फैसला: JSSC-CGL और CDPO नियुक्तियां रद्द करने के आदेश पर अंतरिम रोक

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सर्च न्यूज: सच के साथ: रांची: झारखंड में भर्ती परीक्षाओं को लेकर चल रहे विवाद के बीच झारखंड हाईकोर्ट ने शुक्रवार को राज्य सरकार को बड़ा झटका देते हुए JSSC-CGL और चाइल्ड डेवलपमेंट प्रोजेक्ट ऑफिसर (CDPO) परीक्षा के जरिए हुई नियुक्तियों को रद्द करने संबंधी अधिसूचनाओं पर अंतरिम रोक लगा दी। यह फैसला उन अभ्यर्थियों और कर्मचारियों के लिए राहत लेकर आया है, जिनकी नियुक्तियां सरकार के हालिया फैसले से प्रभावित होने वाली थीं।

मामले की सुनवाई न्यायमूर्ति दीपक रोशन की अदालत में हुई। याचिकाकर्ताओं की ओर से दलील दी गई कि सरकार ने भर्ती परीक्षाओं और नियुक्तियों को रद्द करने का फैसला निर्धारित नियमों और कानूनी प्रक्रिया का पालन किए बिना लिया। याचिकाकर्ताओं ने यह भी सवाल उठाया कि यदि किसी भर्ती प्रक्रिया में अनियमितता की आशंका है, तो उसकी जिम्मेदारी तय करते हुए दोषी अभ्यर्थियों या संबंधित व्यक्तियों पर कार्रवाई की जानी चाहिए, न कि सभी चयनित उम्मीदवारों की नियुक्तियां एक साथ रद्द की जाएं।हाईकोर्ट ने मामले में राज्य सरकार और झारखंड लोक सेवा आयोग (JPSC) से जवाब मांगा है। अदालत ने दोनों पक्षों को अपना विस्तृत पक्ष रखने का निर्देश दिया है। उपलब्ध रिपोर्टों के अनुसार, मामले की अगली सुनवाई 15 सितंबर 2026 को होगी, जबकि सरकार और JPSC को इससे पहले अपना जवाब दाखिल करना है।गौरतलब है कि झारखंड सरकार ने हाल ही में भर्ती परीक्षाओं में कथित गड़बड़ियों और अनियमितताओं को लेकर JSSC-CGL समेत कई भर्ती परीक्षाओं को रद्द करने का फैसला किया था। सरकार के इस कदम के बाद चयनित अभ्यर्थियों और पहले से नियुक्त कर्मचारियों में नाराजगी बढ़ गई थी। JSSC-CGL के सफल अभ्यर्थियों ने अपनी नियुक्तियों को रद्द किए जाने के खिलाफ हाईकोर्ट का रुख किया था। रिपोर्टों के मुताबिक, इस परीक्षा से चयनित करीब 2,000 अभ्यर्थियों के भविष्य को लेकर अनिश्चितता पैदा हो गई थी।

वहीं, भर्ती परीक्षाओं में कथित अनियमितताओं को लेकर छात्र संगठनों का आंदोलन भी जारी रहा है। सरकार ने कई परीक्षाओं की जांच का निर्णय लिया है, जबकि दूसरी ओर चयनित अभ्यर्थी नियुक्तियां रद्द किए जाने का विरोध कर रहे हैं। ऐसे में हाईकोर्ट की अंतरिम रोक ने फिलहाल दोनों पक्षों के बीच चल रहे विवाद में एक महत्वपूर्ण कानूनी मोड़ ला दिया है।

अंतरिम रोक का मतलब यह है कि संबंधित रद्दीकरण अधिसूचनाओं पर फिलहाल कार्रवाई आगे नहीं बढ़ेगी। हालांकि, यह अंतिम फैसला नहीं है। मामले में राज्य सरकार और JPSC का जवाब, आगे की सुनवाई और अदालत के अंतिम आदेश से ही यह स्पष्ट होगा कि JSSC-CGL और CDPO से जुड़ी नियुक्तियों का भविष्य क्या होगा।

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