September 5, 2026

Jamshedpur MP Bidyut Baran Mahato met Amit Shah: कुड़माली भाषा को आठवीं अनुसूची में शामिल करने की मांग, जमशेदपुर सांसद विद्युतवरण महतो ने अमित शाह से की मुलाकात

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सर्च न्यूज: सच के साथ: जमशेदपुर/नई दिल्ली: जमशेदपुर के सांसद विद्युतवरण महतो ने केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह से मुलाकात कर कुड़माली भाषा को भारतीय संविधान की आठवीं अनुसूची में शामिल करने की मांग उठाई। सांसद के साथ अन्य सांसदों का प्रतिनिधिमंडल भी मौजूद रहा। मुलाकात के दौरान कुड़माली भाषा की संवैधानिक मान्यता से जुड़े मुद्दे पर चर्चा की गई।

कुड़माली झारखंड और आसपास के क्षेत्रों में बोली जाने वाली महत्वपूर्ण क्षेत्रीय भाषाओं में से एक है। इसे आठवीं अनुसूची में शामिल किए जाने की मांग लंबे समय से विभिन्न सामाजिक एवं भाषाई संगठनों द्वारा उठाई जाती रही है। आठवीं अनुसूची में शामिल होने से किसी भाषा को संविधान के स्तर पर विशेष मान्यता मिलती है और उसके संरक्षण, विकास तथा प्रसार के लिए संस्थागत प्रयासों को मजबूती मिल सकती है।सांसद विद्युतवरण महतो ने केंद्रीय गृह मंत्री के समक्ष इस मांग को रखते हुए कुड़माली भाषा की सांस्कृतिक, सामाजिक और ऐतिहासिक महत्ता पर जोर दिया। उनका कहना है कि भाषा किसी भी समुदाय की पहचान और संस्कृति का महत्वपूर्ण आधार होती है। इसलिए कुड़माली को संवैधानिक मान्यता मिलने से इसके संरक्षण के साथ-साथ आने वाली पीढ़ियों में भाषा के प्रति जागरूकता और गौरव की भावना भी बढ़ेगी।

झारखंड में कुड़माली भाषा को लेकर पहले भी संवैधानिक मान्यता की मांग उठती रही है। विभिन्न मंचों पर इसे आठवीं अनुसूची में शामिल करने की मांग प्रस्तावों और आंदोलनों का हिस्सा रही है।आठवीं अनुसूची में वर्तमान में भारतीय संविधान द्वारा मान्यता प्राप्त भाषाएं शामिल हैं। किसी नई भाषा को इसमें शामिल करने का विषय केंद्र सरकार और संसद की संवैधानिक प्रक्रिया से जुड़ा होता है। इसलिए सांसद की गृह मंत्री से मुलाकात को इस दिशा में राजनीतिक और संस्थागत स्तर पर महत्वपूर्ण पहल के रूप में देखा जा रहा है।

इस मुलाकात से कुड़माली भाषा के समर्थकों में उम्मीद जगी है कि केंद्र सरकार इस मांग पर गंभीरता से विचार करेगी। यदि भविष्य में कुड़माली को आठवीं अनुसूची में शामिल करने की प्रक्रिया आगे बढ़ती है, तो इसका लाभ भाषा के शैक्षणिक विकास, साहित्य, शोध, प्रशासनिक उपयोग और संरक्षण के क्षेत्र में देखने को मिल सकता है।कुड़माली को संवैधानिक मान्यता देने की मांग केवल भाषाई अधिकार का मुद्दा नहीं है, बल्कि यह झारखंड की समृद्ध भाषाई और सांस्कृतिक विविधता को संरक्षित करने से भी जुड़ा विषय है। सांसद विद्युतवरण महतो की केंद्रीय गृह मंत्री से हुई मुलाकात के बाद अब इस मांग पर केंद्र सरकार की आगे की पहल पर सभी की नजर रहेगी।

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