September 4, 2026

India’s First Hydrogen Train: भारत की पहली हाइड्रोजन ट्रेन का सफर शुरू: 10 कोच, 110 किमी की रफ्तार और जीरो प्रदूषण का नया इतिहास, प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने दिखाई हरी झंडी

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सर्च न्यूज: सच के साथ: प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने हरियाणा के जींद रेलवे स्टेशन से देश की पहली स्वदेशी हाइड्रोजन-संचालित ट्रेन को हरी झंडी दिखाई है。यह ट्रेन जींद-सोनीपत खंड पर 75 किमी/घंटे की अधिकतम रफ्तार से चलेगी。1,200 किलोवाट क्षमता वाली इस ट्रेन के इंजन से धुएं की जगह सिर्फ पानी की भाप निकलेगी, जिससे पर्यावरण को कोई नुकसान नहीं होगा

भारतीय रेलवे ने पर्यावरण-अनुकूल यातायात की दिशा में एक ऐतिहासिक कदम बढ़ाते हुए देश की पहली हाइड्रोजन फ्यूल सेल ट्रेन (नमो ग्रीन रेल) की शुरुआत कर दी है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने हरियाणा के जींद रेलवे स्टेशन से इस महत्वाकांक्षी ट्रेन सेवा को हरी झंडी दिखाकर रवाना किया. यह ट्रेन जींद और सोनीपत के बीच 89 किलोमीटर लंबे ट्रैक पर संचालित होगी, जिससे भारतीय रेल में डीजल की निर्भरता को कम करने और हरित ऊर्जा को बढ़ावा देने के नए युग की शुरुआत हुई है.

इस अत्याधुनिक ट्रेन को पूरी तरह से स्वदेशी तकनीक (Make in India) के तहत डिज़ाइन और तैयार किया गया है. इसकी सबसे बड़ी खासियत यह है कि यह पारंपरिक डीजल इंजनों के विपरीत पूरी तरह प्रदूषण मुक्त है. इसमें लगे हाइड्रोजन फ्यूल सेल हवा की ऑक्सीजन के साथ मिलकर ऑनबोर्ड बिजली पैदा करते हैं, जिससे यह चलती है. इस पूरी प्रक्रिया में शून्य कार्बन उत्सर्जन होता है और उप-उत्पाद के रूप में केवल पानी की भाप (वॉटर वेपर) और गर्मी निकलती है.तकनीकी रूप से यह ट्रेन दुनिया के सबसे शक्तिशाली और लंबे हाइड्रोजन ट्रेनसेट्स में से एक है. यह 10 कोच वाली ट्रेन है, जिसमें 2 ड्राइविंग पावर कार और 8 पैसेंजर कोच शामिल हैं. इस ट्रेन की डिजाइनिंग स्पीड 110 किलोमीटर प्रति घंटा है, जिसे शुरुआत में जींद-सोनीपत मार्ग पर 75 किमी/घंटे की रफ्तार से चलाया जाएगा. इस ट्रेन में कुल 2,600 यात्रियों के सफर करने की विशाल क्षमता है.

सुरक्षा के लिहाज से भी इस ट्रेन में कड़े और अत्याधुनिक इंतजाम किए गए हैं. हाइड्रोजन गैस अत्यधिक ज्वलनशील होने के कारण ट्रेन में विशेष हाई-प्रेशर सिलेंडर और रिफ्यूलिंग सिस्टम लगाए गए हैं. इसके साथ ही इसमें हाइड्रोजन लीकेज, धुआं, आग और अत्यधिक गर्मी का तुरंत पता लगाने वाले ऑटोमैटिक सेंसर और सुरक्षा प्रणालियां शामिल की गई हैं. इसके सफल संचालन के साथ ही भारत दुनिया के उन चुनिंदा एलीट देशों में शामिल हो गया है जो हाइड्रोजन आधारित रेल तकनीक का इस्तेमाल कर रहे हैं.

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