हर वीकेंड 600 किमी सफर, सूखे गांवों में लौटाई पानी की उम्मीद
जब अधिकांश लोग सप्ताहांत में आराम की तैयारी करते हैं, तब आयकर विभाग में संयुक्त आयुक्त के पद पर कार्यरत डॉ. पी. सुधाकर नाइक हर शुक्रवार रात एक अलग मिशन पर निकल पड़ते थे। मुंबई से करीब 600 किलोमीटर दूर तेलंगाना के सूखाग्रस्त नारायणखेड़ क्षेत्र तक उनका यह सफर केवल यात्रा नहीं, बल्कि जल संकट से जूझ रहे गांवों के लिए उम्मीद की नई शुरुआत था।
इस पूरी पहल पर लगभग दो लाख रुपये की लागत आई, लेकिन इसका प्रभाव कहीं अधिक बड़ा साबित हुआ। शुरुआत में ग्रामीणों को इस प्रयास की सफलता पर संदेह था, लेकिन हर सप्ताह डॉ. नाइक को उनके साथ कंधे से कंधा मिलाकर काम करते देख लोगों का भरोसा बढ़ता गया। धीरे-धीरे पूरा गांव इस अभियान का हिस्सा बन गया और सामूहिक प्रयास ने जल संरक्षण की दिशा में नई मिसाल कायम की।
आज जिन गांवों में कभी बारिश का पानी बेकार बह जाता था, वहीं अब वही पानी जमीन के भीतर पहुंचकर सूखते बोरवेल और खेती के लिए नई उम्मीद बन रहा है। डॉ. सुधाकर नाइक की यह पहल बताती है कि बड़े बदलाव हमेशा बड़े बजट से नहीं, बल्कि मजबूत संकल्प, सामुदायिक भागीदारी और समाज के प्रति जिम्मेदारी की भावना से शुरू होते हैं।
