November 5, 2026

Gyanesh Kumar will spearhead preparations for the 2029 Lok Sabha elections: लोकसभा चुनाव 2029 की नींव मजबूत करने की चुनौती, ज्ञानेश कुमार संभालेंगे मोर्चा

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सर्च न्यूज: सच के साथ: नई दिल्ली: भारत के मुख्य निर्वाचन आयुक्त (CEC) ज्ञानेश कुमार के कार्यकाल में देश की चुनावी व्यवस्था कई महत्वपूर्ण पड़ावों से गुजरेगी। 1988 बैच के केरल कैडर के पूर्व आईएएस अधिकारी ज्ञानेश कुमार ने 19 फरवरी 2025 को भारत के 26वें मुख्य निर्वाचन आयुक्त के रूप में पदभार संभाला था। निर्वाचन आयोग के आधिकारिक रिकॉर्ड के अनुसार, इससे पहले वे मार्च 2024 से चुनाव आयुक्त के रूप में काम कर चुके हैं।

2029 के लोकसभा चुनाव की तैयारियां उनके कार्यकाल में: ज्ञानेश कुमार का निर्धारित कार्यकाल 26 जनवरी 2029 तक है। वहीं अगला लोकसभा चुनाव 2029 में होना है। ऐसे में एक महत्वपूर्ण तथ्य यह है कि लोकसभा चुनाव की व्यापक तैयारियां उनके नेतृत्व में होंगी, लेकिन चुनाव के मतदान के समय तक उनका निर्धारित कार्यकाल समाप्त हो चुका होगा। इसलिए यह कहना अधिक सटीक है कि वे 2029 के आम चुनाव की तैयारी और उससे जुड़ी चुनावी व्यवस्था की नींव रखने में अहम भूमिका निभाएंगे।

सामने होंगी कई बड़ी चुनावी चुनौतियां: ज्ञानेश कुमार के कार्यकाल में देश के कई राज्यों में विधानसभा चुनाव होने हैं। इसके अलावा 2027 में राष्ट्रपति और उपराष्ट्रपति के चुनाव भी होने हैं। इन चुनावों के संचालन के साथ-साथ निर्वाचन आयोग को मतदाता सूची को अद्यतन रखने, मतदान प्रक्रिया को अधिक सुगम बनाने, चुनावी पारदर्शिता बढ़ाने और चुनाव संबंधी शिकायतों पर प्रभावी कार्रवाई जैसी जिम्मेदारियां भी निभानी होंगी।

मतदाता सूची को लेकर बड़ा जोर: ज्ञानेश कुमार ने भारत में मतदाता सूची तैयार करने की प्रक्रिया को दुनिया के सबसे कठिन और पारदर्शी कार्यों में से एक बताया है। उनके अनुसार मतदाता सूची चुनावी प्रक्रिया की शुचिता और सटीकता का महत्वपूर्ण आधार है। आयोग का कहना है कि मतदाता सूची में संशोधन के दौरान दावों और आपत्तियों की प्रक्रिया के साथ राजनीतिक दलों के साथ भी सूची साझा की जाती है।

प्रशासनिक अनुभव भी बड़ी ताकत: ज्ञानेश कुमार को केंद्र और राज्य सरकार में लंबे प्रशासनिक अनुभव का लाभ मिलेगा। उन्होंने केरल सरकार में विभिन्न जिम्मेदारियां संभालने के अलावा केंद्र में रक्षा मंत्रालय, गृह मंत्रालय, संसदीय कार्य मंत्रालय और सहकारिता मंत्रालय में महत्वपूर्ण पदों पर काम किया है। निर्वाचन आयोग के अनुसार वे जनवरी 2024 में सेवानिवृत्ति से पहले केंद्र सरकार में सहकारिता मंत्रालय के सचिव थे।जम्मू-कश्मीर से जुड़े प्रशासनिक मामलों में भी उनका अनुभव रहा है। इसके अलावा वे अयोध्या में राम मंदिर निर्माण से संबंधित ट्रस्ट के गठन की प्रक्रिया में बनी समिति का हिस्सा भी रहे हैं। इन अनुभवों के कारण उनके कार्यकाल को प्रशासनिक और राजनीतिक रूप से महत्वपूर्ण माना गया।

2029 से पहले चुनावी व्यवस्था को मजबूत करने की चुनौती: 2029 के लोकसभा चुनाव से पहले निर्वाचन आयोग के सामने बड़ी संख्या में मतदाताओं, विशाल भौगोलिक क्षेत्र, लाखों मतदान केंद्रों, सुरक्षा व्यवस्था और चुनावी मशीनरी के समन्वय की चुनौती होगी। आयोग को ईवीएम और वीवीपैट की उपलब्धता, भंडारण और रखरखाव से लेकर मतदान कर्मियों और सुरक्षा बलों की तैनाती तक व्यापक तैयारी करनी होगी। संभावित एक साथ चुनाव की व्यवस्था को लेकर भी आयोग को प्रशासनिक तैयारियां करनी पड़ सकती हैं।इस लिहाज से ज्ञानेश कुमार का कार्यकाल भारतीय चुनावी व्यवस्था के लिए बेहद महत्वपूर्ण माना जा रहा है। 2029 के लोकसभा चुनाव का अंतिम संचालन उनके उत्तराधिकारी के कार्यकाल में हो सकता है, लेकिन उस चुनाव की तैयारियों की बड़ी जिम्मेदारी ज्ञानेश कुमार के नेतृत्व वाले निर्वाचन आयोग पर रहेगी। लोकतांत्रिक प्रक्रिया में भरोसा, पारदर्शिता और निष्पक्षता बनाए रखना उनके कार्यकाल की सबसे बड़ी कसौटी होगी।