November 3, 2026

दिल्ली में मेट्रो प्रतिबंधों पर सुप्रीम कोर्ट की सख्त टिप्पणी, आम जनता की परेशानी पर जताई चिंता

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सर्च न्यूज: सच के साथ: नई दिल्ली, 9 अक्टूबर 2026। दिल्ली में 10 अक्टूबर को प्रस्तावित प्रदर्शन से पहले मेट्रो स्टेशनों के प्रवेश एवं निकास द्वार बंद करने और रेल सेवाओं पर प्रतिबंधों को लेकर सुप्रीम कोर्ट ने गंभीर चिंता जताई। मुख्य न्यायाधीश न्यायमूर्ति सूर्यकांत की अध्यक्षता वाली पीठ ने कहा कि कानून-व्यवस्था बनाए रखने के लिए आवश्यक कदम उठाए जा सकते हैं, लेकिन उनका असर आम नागरिकों की रोजमर्रा की जिंदगी और आवाजाही पर भी ध्यान में रखा जाना चाहिए।सुनवाई के दौरान अदालत ने विशेष रूप से उन यात्रियों की परेशानी का उल्लेख किया, जो गुरुग्राम, ग्रेटर नोएडा और दिल्ली-एनसीआर के अन्य क्षेत्रों से काम, पढ़ाई और दूसरे जरूरी कार्यों के लिए यात्रा करते हैं। विद्यार्थियों, कर्मचारियों और वरिष्ठ नागरिकों के लिए सार्वजनिक परिवहन की अहमियत पर जोर देते हुए पीठ ने कहा कि सुरक्षा व्यवस्था के नाम पर परिवहन को पूरी तरह ठप करने जैसी स्थिति से बचना चाहिए।प्रतिबंधों के बजाय संतुलित व्यवस्था पर जोर: अदालत ने संकेत दिया कि प्रदर्शन के दौरान भीड़ और सुरक्षा संबंधी चुनौतियों से निपटने के लिए आवश्यक प्रतिबंध लगाए जा सकते हैं, लेकिन कार्रवाई परिस्थितियों के अनुपात में होनी चाहिए। पीठ ने प्रदर्शनकारियों के लिए किसी बड़े वैकल्पिक स्थान की संभावना पर भी विचार करने का सुझाव दिया, जहां आवश्यक सुविधाएं और आपातकालीन सहायता उपलब्ध कराई जा सके।

केंद्र सरकार की ओर से पेश सॉलिसिटर: जनरल तुषार मेहता ने अदालत को आश्वासन दिया कि वह इन चिंताओं को सरकार के समक्ष रखेंगे और परिस्थितियों के अनुसार उचित कदमों पर विचार किया जाएगा।मेट्रो सेवाओं को पूरी तरह रोकने के बजाय नियमन की बातसमाचार एजेंसी ANI के हवाले से प्रकाशित रिपोर्ट के अनुसार, सुप्रीम कोर्ट ने मेट्रो ट्रेनों की आवाजाही पर पूर्ण प्रतिबंध नहीं लगाने और मेट्रो तथा अन्य रेल सेवाओं को नियंत्रित तरीके से संचालित करने पर जोर दिया। अदालत ने संबंधित अधिकारियों से यह भी कहा कि लिए गए निर्णयों की जानकारी व्यापक रूप से सार्वजनिक की जाए, ताकि यात्रियों को समय रहते सूचना मिल सके।

दिल्ली पुलिस ने प्रस्तावित प्रदर्शन को देखते हुए 57 मेट्रो स्टेशनों के प्रवेश और निकास द्वार बंद करने तथा कुछ स्थानों पर ट्रेनों की आवृत्ति कम करने के लिए कदम उठाए थे। इन व्यवस्थाओं का उद्देश्य संवेदनशील स्थानों की ओर अनियंत्रित भीड़ की आवाजाही रोकना और कानून-व्यवस्था बनाए रखना बताया गया।सुरक्षा और नागरिक सुविधा—दोनों जरूरीइस सुनवाई ने एक महत्वपूर्ण सवाल सामने रखा है कि सार्वजनिक सुरक्षा सुनिश्चित करते समय आम लोगों की दैनिक जरूरतों और परिवहन सुविधाओं को किस तरह सुरक्षित रखा जाए। प्रदर्शन का अधिकार और कानून-व्यवस्था बनाए रखने की जिम्मेदारी—दोनों के बीच संतुलन स्थापित करना प्रशासन के लिए महत्वपूर्ण चुनौती है।

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