September 4, 2026

भारत अब ‘फार्मेसी ऑफ द वर्ल्ड’ से आगे बढ़कर बने ‘लैबोरेटरी ऑफ द वर्ल्ड’: केंद्रीय मंत्री अनुप्रिया पटेल

Screenshot_20260823_102039_ChatGPT

सर्च न्यूज: सच के साथ: अहमदाबाद: केंद्रीय स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण तथा रसायन एवं उर्वरक राज्य मंत्री अनुप्रिया पटेल ने कहा है कि भारत को केवल दुनिया की “फार्मेसी” बने रहने के बजाय अब “लैबोरेटरी ऑफ द वर्ल्ड” बनने की दिशा में आगे बढ़ना चाहिए। उन्होंने इसके लिए शोध, नवाचार और आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) को स्वास्थ्य क्षेत्र के विकास का प्रमुख आधार बताया।

पटेल ने अहमदाबाद स्थित IIM अहमदाबाद में आयोजित IIMA Healthcare Summit 2026 के दौरान स्वास्थ्य क्षेत्र में AI की भूमिका पर चर्चा करते हुए यह बात कही। उन्होंने कहा कि भारतीय फार्मास्युटिकल उद्योग ने दुनियाभर में जेनेरिक दवाओं और वैक्सीन की आपूर्ति के जरिए महत्वपूर्ण पहचान बनाई है, लेकिन अब भारत को दवाओं के निर्माण के साथ-साथ नई दवाओं और उपचार पद्धतियों की खोज एवं विकास में भी अग्रणी भूमिका निभानी होगी

AI से दवा खोज और इलाज में तेजी: केंद्रीय मंत्री ने कहा कि आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस स्वास्थ्य सेवाओं में एक “फोर्स मल्टीप्लायर” के रूप में काम कर सकता है। AI की मदद से दवा खोज की प्रक्रिया को तेज किया जा सकता है, बड़ी मात्रा में मेडिकल डेटा का विश्लेषण किया जा सकता है और मरीजों के लिए अधिक व्यक्तिगत उपचार विकसित किए जा सकते हैं। उन्होंने यह भी कहा कि AI का इस्तेमाल स्क्रीनिंग, बीमारी की निगरानी, क्लिनिकल निर्णय लेने और दूरदराज के क्षेत्रों में स्वास्थ्य सेवाएं पहुंचाने में किया जा सकता है। हालांकि, उन्होंने इस बात पर जोर दिया कि AI को मानवीय चिकित्सकीय निर्णय का स्थान नहीं लेना चाहिए, बल्कि डॉक्टरों और स्वास्थ्य विशेषज्ञों की क्षमता को मजबूत करना चाहिए।

फार्मेसी ऑफ द वर्ल्ड’ की पहचान से आगे बढ़ने की जरूरत: भारत को लंबे समय से सस्ती और गुणवत्तापूर्ण जेनेरिक दवाओं तथा वैक्सीन की बड़ी आपूर्ति के कारण “फार्मेसी ऑफ द वर्ल्ड” कहा जाता है। मंत्री के अनुसार, अब अगला लक्ष्य केवल दुनिया के लिए दवाएं बनाना नहीं, बल्कि दवाओं और नई चिकित्सा तकनीकों के अनुसंधान एवं विकास का वैश्विक केंद्र बनना होना चाहिए। उन्होंने कोविड-19 महामारी का उदाहरण देते हुए कहा कि भारतीय फार्मा उद्योग ने महामारी के दौरान दुनिया के 200 से अधिक देशों को वैक्सीन और जरूरी चिकित्सा उत्पादों की आपूर्ति में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। भारत के कोविड टीकाकरण अभियान में 2.2 अरब से अधिक खुराक दी गईं।

2047 के विकसित भारत के लक्ष्य से जुड़ा प्रयास: मंत्री ने कहा कि भारत की बड़ी और विविध आबादी तथा अलग-अलग भौगोलिक परिस्थितियों को देखते हुए स्वास्थ्य सेवाओं में “वन-साइज-फिट्स-ऑल” मॉडल पर्याप्त नहीं है। अलग-अलग मरीजों के लिए उनकी जरूरत और परिस्थितियों के अनुरूप उपचार विकसित करना जरूरी होगा। ऐसे में AI, जैव-प्रौद्योगिकी, आधुनिक शोध और डेटा आधारित स्वास्थ्य प्रणालियां महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकती हैं। कुल मिलाकर, सरकार का जोर भारत को दवा निर्माण की मौजूदा ताकत से आगे ले जाकर अनुसंधान, नई दवा खोज, मेडिकल टेक्नोलॉजी और AI आधारित स्वास्थ्य नवाचार का वैश्विक केंद्र बनाने पर है। यह बदलाव भारत के फार्मास्युटिकल क्षेत्र को अधिक उच्च-मूल्य और शोध-आधारित उद्योग में बदलने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है।

You may have missed