November 5, 2026

भागवत का बड़ा बयान, ‘शरणार्थी नहीं, राष्ट्र के योद्धा थे’

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राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (आरएसएस) के सरसंघचालक मोहन भागवत ने देश के विभाजन को लेकर एक महत्वपूर्ण टिप्पणी करते हुए कहा कि 1947 के बंटवारे के बाद पाकिस्तान से भारत आने वाले लोग केवल शरणार्थी नहीं थे, बल्कि वे राष्ट्र और अपनी आस्था के लिए संघर्ष करने वाले योद्धा थे। उन्होंने कहा कि इन लोगों ने परिस्थितियों से मजबूर होकर नहीं, बल्कि अपनी मातृभूमि और सांस्कृतिक पहचान के प्रति समर्पण के कारण कठिनाइयों से भरा रास्ता चुना।

एक कार्यक्रम को संबोधित करते हुए भागवत ने कहा कि विभाजन के दौरान लाखों लोगों ने अपना घर, जमीन-जायदाद और वर्षों की मेहनत से बसाई जिंदगी पीछे छोड़ दी, लेकिन उन्होंने भारत को अपना भविष्य मानते हुए यहां आने का निर्णय लिया। उनके अनुसार, इन लोगों ने असाधारण साहस, धैर्य और त्याग का परिचय दिया, इसलिए उन्हें केवल “शरणार्थी” कहना उनके संघर्ष को कम करके आंकने जैसा होगा।

आरएसएस प्रमुख ने कहा कि विभाजन भारतीय इतिहास की सबसे पीड़ादायक घटनाओं में से एक था, जिसने करोड़ों लोगों के जीवन को प्रभावित किया। उनका मानना है कि उस दौर में विस्थापित हुए लोगों के अनुभव और बलिदान को नई पीढ़ी तक पहुंचाना जरूरी है, ताकि देश के इतिहास और सामाजिक चुनौतियों को बेहतर ढंग से समझा जा सके।

मोहन भागवत का यह बयान ऐसे समय आया है जब देश में विभाजन और उससे जुड़े ऐतिहासिक प्रसंगों पर लगातार चर्चा हो रही है। उनके इस वक्तव्य ने विभाजन के दौरान भारत आए लोगों के योगदान और संघर्ष को लेकर नई बहस को जन्म दिया है। इतिहासकारों और सामाजिक विश्लेषकों का मानना है कि विभाजन की मानवीय त्रासदी को समझने के साथ-साथ विस्थापित परिवारों के साहस और पुनर्निर्माण की कहानी भी भारतीय इतिहास का महत्वपूर्ण हिस्सा है।