“AI के लिए इंसानों की जगह मशीनें?” — Meta में सबसे बड़ा बदलाव, हजारों कर्मचारियों पर गिरी गाज
दुनिया की सबसे बड़ी टेक कंपनियों में शामिल Meta अब पूरी तरह AI-केंद्रित भविष्य की ओर बढ़ती दिखाई दे रही है। कंपनी ने एक बड़े आंतरिक पुनर्गठन (Restructuring) की तैयारी कर ली है, जिसके तहत हजारों कर्मचारियों की भूमिकाएं बदलेंगी, कई मैनेजमेंट पद खत्म होंगे और बड़ी संख्या में स्टाफ को AI प्रोजेक्ट्स में शिफ्ट किया जाएगा। इस फैसले ने टेक इंडस्ट्री में हलचल मचा दी है।
Meta की Chief People Officer Janelle Gale द्वारा कर्मचारियों को भेजे गए मेमो में बताया गया कि कंपनी अब ऐसे AI Agents विकसित करना चाहती है जो भविष्य में इंसानों द्वारा किए जाने वाले कई कार्य खुद कर सकें। इसके लिए Applied AI Engineering (AAI) और Agent Transformation Accelerator जैसी नई टीमें बनाई जा रही हैं। इन टीमों का लक्ष्य ऐसे सिस्टम तैयार करना है जो ऑटोमैटिक तरीके से कार्य कर सकें और कंपनी की प्रोडक्टिविटी को कई गुना बढ़ा सकें।
लेकिन इस बदलाव ने Meta के अंदर भारी असंतोष भी पैदा कर दिया है। रिपोर्ट के मुताबिक, कर्मचारियों ने कंपनी के दफ्तरों में विरोध प्रदर्शन शुरू कर दिया है। सबसे ज्यादा विवाद उस “Mouse-Tracking Technology” को लेकर हो रहा है जिसे कथित तौर पर AI को ट्रेन करने के लिए इस्तेमाल किया जाएगा। कर्मचारियों का कहना है कि यह टेक्नोलॉजी उनकी प्राइवेसी और डिजिटल गतिविधियों पर नजर रख सकती है। इस विरोध में 1,000 से ज्यादा कर्मचारियों ने एक याचिका पर हस्ताक्षर भी किए हैं।
बताया जा रहा है कि कई कर्मचारी कंपनी के अंदर खुलकर सवाल उठा रहे हैं कि क्या AI के नाम पर इंसानों की नौकरियां धीरे-धीरे खत्म की जा रही हैं। Meta के कई कर्मचारी पिछले कुछ हफ्तों से आंतरिक प्लेटफॉर्म Workplace पर “elephant in the room” वाले पोस्ट डालकर कंपनी से छंटनी पर स्पष्ट जवाब मांग रहे थे।
Meta का यह कदम सिर्फ एक कंपनी का बदलाव नहीं माना जा रहा, बल्कि यह पूरी टेक इंडस्ट्री के भविष्य की झलक भी हो सकता है। Google, Microsoft, Amazon और दूसरी बड़ी कंपनियां भी तेजी से AI Automation की ओर बढ़ रही हैं। विशेषज्ञों का मानना है कि आने वाले वर्षों में AI केवल काम करने का तरीका नहीं बदलेगा, बल्कि यह तय करेगा कि किन नौकरियों की जरूरत रहेगी और कौन-सी भूमिकाएं मशीनों द्वारा संभाल ली जाएंगी।
अब सबसे बड़ा सवाल यही उठ रहा है —क्या AI इंसानों की मदद करेगा, या धीरे-धीरे उनकी जगह ले लेगा?
