“अब ज़्यादा बच्चे पैदा करें?” 140 करोड़ आबादी वाले भारत में नई जनसंख्या बहस तेज
एक तरफ भारत दुनिया का सबसे अधिक आबादी वाला देश बन चुका है, वहीं दूसरी तरफ अब देश में “बड़ी फैमिली” को बढ़ावा देने की बहस भी तेज होती दिख रही है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के सहयोगी दलों और कुछ हिंदू संगठनों ने घटती जन्म दर को भविष्य के लिए बड़ा खतरा बताते हुए ज्यादा बच्चे पैदा करने की वकालत शुरू कर दी है। इस मुद्दे ने देश में नई राजनीतिक और सामाजिक चर्चा छेड़ दी है।
दरअसल, भारत की कुल प्रजनन दर (TFR) अब 2 के करीब पहुंच चुकी है, जबकि आबादी को स्थिर बनाए रखने के लिए 2.1 का स्तर जरूरी माना जाता है। विशेषज्ञों का कहना है कि अगर जन्म दर लगातार घटती रही, तो आने वाले दशकों में भारत भी जापान और दक्षिण कोरिया जैसे देशों की तरह बुजुर्ग आबादी और श्रमिकों की कमी की चुनौती का सामना कर सकता है।
राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (RSS) ने भी इस मुद्दे को गंभीर बताते हुए कहा है कि देश की युवा आबादी धीरे-धीरे कम हो रही है और भविष्य में इसका असर अर्थव्यवस्था तथा सामाजिक संतुलन पर पड़ सकता है। वहीं दूसरी ओर कई अर्थशास्त्री और सामाजिक विशेषज्ञ मानते हैं कि भारत पहले से ही बेरोजगारी, संसाधनों पर दबाव और शहरी भीड़ जैसी समस्याओं से जूझ रहा है, ऐसे में ज्यादा आबादी को बढ़ावा देना नई चुनौतियां खड़ी कर सकता है।
इस बहस के बीच एक बड़ा सवाल अब देशभर में चर्चा का विषय बन गया है — क्या भारत को अब “छोटा परिवार, सुखी परिवार” की सोच बदलनी होगी, या फिर बढ़ती आबादी पहले से ही सबसे बड़ी चुनौती बनी हुई है?
