September 5, 2026

4 खाते, 68 करोड़ की ठगी और बैंक अफसर! ऐसे खुला साइबर सिंडिकेट का खौफनाक खेल

bank-manager-arrested

नई दिल्ली: साइबर ठगों के जाल में फंसे लोगों की कहानियां तो आपने बहुत सुनी होंगी, लेकिन इस बार जांच एजेंसियों के सामने जो तस्वीर आई, उसने बैंकिंग सिस्टम पर भी बड़े सवाल खड़े कर दिए हैं। करोड़ों रुपये की साइबर ठगी की रकम, फर्जी कंपनी, चोरी की पहचान और एक बैंक अधिकारी की कथित भूमिका—इन सबने मिलकर ऐसा नेटवर्क तैयार किया, जिसने जांचकर्ताओं को भी चौंका दिया।

जांच की शुरुआत एक संदिग्ध बैंक खाते से हुई। शुरुआत में यह सिर्फ एक सामान्य वित्तीय लेन-देन का मामला लग रहा था, लेकिन जब अधिकारियों ने पैसों के प्रवाह को खंगाला तो कहानी परत-दर-परत खुलती चली गई। जांच में सामने आया कि जिस खाते के जरिए रकम का लेन-देन हो रहा था, उसका संबंध देशभर में दर्ज बड़ी संख्या में साइबर ठगी की शिकायतों से जुड़ा हुआ है।

सबसे चौंकाने वाली बात यह रही कि खाते में करोड़ों रुपये का ट्रांजैक्शन हुआ। जांच एजेंसियों के मुताबिक, इस खाते के जरिए करीब 68 करोड़ रुपये की रकम गुजरने के संकेत मिले हैं। आरोप है कि यह पैसा विभिन्न साइबर अपराधों से जुड़ा था और उसे अलग-अलग खातों के जरिए आगे भेजा गया, ताकि असली स्रोत तक पहुंचना मुश्किल हो जाए।

जांच जैसे-जैसे आगे बढ़ी, शक की सुई बैंक के एक अधिकारी की ओर घूम गई। आरोप है कि फर्जी दस्तावेजों और संदिग्ध पहचान के आधार पर खाता खोलने में नियमों की अनदेखी की गई। यही खाता बाद में साइबर ठगों के लिए करोड़ों रुपये की ‘मनी रूट’ बन गया।

इस खुलासे ने एक बार फिर दिखा दिया है कि साइबर अपराधी अब सिर्फ तकनीक के भरोसे नहीं हैं, बल्कि वे बैंकिंग सिस्टम की कमजोरियों का भी फायदा उठाने की कोशिश कर रहे हैं। जांच एजेंसियां अब यह पता लगाने में जुटी हैं कि इस नेटवर्क में और कौन-कौन शामिल था और आखिर करोड़ों रुपये की यह रकम कहां-कहां पहुंची।

फिलहाल यह मामला सिर्फ एक साइबर फ्रॉड नहीं, बल्कि बैंकिंग सुरक्षा और KYC प्रक्रियाओं की विश्वसनीयता पर बड़ा सवाल बनकर सामने आया है।

You may have missed