सर्च न्यूज: सच के साथ: कैंसर के इलाज के क्षेत्र में व्यक्तिगत यानी पर्सनलाइज्ड कैंसर वैक्सीन को लेकर वैज्ञानिकों की उम्मीदें बढ़ी हैं। हालिया शोध और क्लिनिकल ट्रायल में ऐसे टीकों ने मरीज के ट्यूमर में मौजूद खास आनुवंशिक बदलावों को पहचानकर प्रतिरक्षा प्रणाली को कैंसर कोशिकाओं पर हमला करने के लिए प्रशिक्षित करने की क्षमता दिखाई है।
इस तकनीक में मरीज के ट्यूमर का आनुवंशिक विश्लेषण कर उसके लिए विशिष्ट neoantigens की पहचान की जाती है। इसके आधार पर तैयार mRNA वैक्सीन शरीर की प्रतिरक्षा प्रणाली को उन कैंसर कोशिकाओं को पहचानने और निशाना बनाने के लिए तैयार करती है। इसका उद्देश्य स्वस्थ कोशिकाओं को कम नुकसान पहुंचाते हुए कैंसर की वापसी या फैलाव के खतरे को कम करना है।हाल ही में Moderna और Merck की व्यक्तिगत mRNA कैंसर वैक्सीन ने हाई-रिस्क मेलानोमा के मरीजों से जुड़े एक बड़े फेज-3 ट्रायल में सकारात्मक नतीजे दिए हैं। वैक्सीन को इम्यूनोथेरेपी दवा Keytruda के साथ इस्तेमाल किया गया और कैंसर के दोबारा लौटने या फैलने के जोखिम में कमी देखी गई। हालांकि, कंपनियों ने अभी पूरे विस्तृत आंकड़े सार्वजनिक नहीं किए हैं।भारत समेत दुनिया भर में इस तरह की तकनीक को लेकर शोध और क्लिनिकल विकास तेजी से आगे बढ़ रहा है। वैज्ञानिकों का मानना है कि भविष्य में अलग-अलग मरीजों के कैंसर की जैविक विशेषताओं के आधार पर अधिक व्यक्तिगत उपचार विकसित किए जा सकते हैं। हालांकि, इस तकनीक की सुरक्षा, लागत, बड़े पैमाने पर उत्पादन और अलग-अलग प्रकार के कैंसर में प्रभावशीलता को लेकर अभी और शोध जरूरी है।