Tata sons board vote for re-appointing N.Chandrasekaran: टाटा संस बोर्ड का बड़ा फैसला: एन. चंद्रशेखरन फिर बनेंगे चेयरमैन, तीसरे कार्यकाल को मिली मंजूरी; RBI के फैसले के बाद IPO की तैयारी तेज
सर्च न्यूज: सच के साथ: मुंबई, 17 सितंबर 2026: टाटा समूह की होल्डिंग कंपनी Tata Sons में गुरुवार को एक महत्वपूर्ण कॉरपोरेट घटनाक्रम सामने आया। कंपनी के बोर्ड ने एन. चंद्रशेखरन को कार्यकारी चेयरमैन के रूप में एक और पांच साल के कार्यकाल के लिए फिर से नियुक्त करने की मंजूरी दे दी है। यह फैसला ऐसे समय में आया है, जब टाटा संस के नेतृत्व परिवर्तन और कंपनी के संभावित शेयर बाजार में लिस्टिंग को लेकर चर्चाएं चल रही थीं।
इस पूरे घटनाक्रम का एक महत्वपूर्ण पहलू भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) का हालिया फैसला है।रिपोर्टों के अनुसार, RBI ने टाटा संस के उस आवेदन को अस्वीकार कर दिया है, जिसमें कंपनी ने अपनी नॉन-बैंकिंग फाइनेंशियल कंपनी (NBFC) के रूप में पंजीकरण समाप्त करने की मांग की थी। टाटा संस ने यह कदम अपने ऊपर लागू होने वाली अनिवार्य शेयर बाजार लिस्टिंग की व्यवस्था से बाहर निकलने के प्रयास के तौर पर उठाया था।
नियामकीय नियमों का पालन और संभावित शेयर बाजार लिस्टिंग का मुद्दा फिर से प्रमुख हो गया है। इसी पृष्ठभूमि में बोर्ड की बैठक में कंपनी के भविष्य और नेतृत्व की निरंतरता पर चर्चा महत्वपूर्ण मानी जा रही थी।
टाटा संस के बोर्ड की बैठक से जुड़ी रिपोर्टों में कंपनी को शेयर बाजार में सूचीबद्ध करने की प्रक्रिया पर भी चर्चा का उल्लेख है। इससे टाटा समूह की होल्डिंग कंपनी के संभावित IPO को लेकर बाजार में रुचि बढ़ी है। हालांकि, बोर्ड द्वारा लिस्टिंग की दिशा में कदम उठाने और वास्तविक IPO लॉन्च होने में अंतर है। IPO की तारीख, शेयर का मूल्य, इश्यू का आकार और अंतिम लिस्टिंग की पुष्टि अलग-अलग नियामकीय तथा कॉरपोरेट प्रक्रियाओं पर निर्भर करेगी। उपलब्ध रिपोर्टों में इन सभी अंतिम विवरणों की पुष्टि नहीं हुई है।
टाटा संस में Tata Trusts की लगभग 66 प्रतिशत हिस्सेदारी बताई जाती है। कंपनी के नेतृत्व और रणनीतिक फैसलों में ट्रस्ट्स की भूमिका महत्वपूर्ण है। इससे पहले चंद्रशेखरन के तीसरे कार्यकाल को लेकर मतभेदों और उत्तराधिकारी चयन पर चर्चा की खबरें सामने आई थीं। बोर्ड की मंजूरी के बावजूद, पुनर्नियुक्ति की आगे की कॉरपोरेट प्रक्रिया और संबंधित शेयरधारक अनुमोदनों की स्थिति पर नजर बनी रहेगी। कुछ रिपोर्टों में टाटा ट्रस्ट्स की संभावित आपत्ति का भी उल्लेख किया गया है, लेकिन इस संबंध में अंतिम स्थिति के लिए आधिकारिक पुष्टि आवश्यक है।
