November 5, 2026

फुटपाथ पर चलना मौलिक अधिकार, सुप्रीम कोर्ट का ऐतिहासिक फैसला

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देश में पैदल चलने वालों के अधिकारों को लेकर सुप्रीम कोर्ट ने एक ऐतिहासिक और दूरगामी प्रभाव वाला फैसला सुनाया है। शीर्ष अदालत ने स्पष्ट कहा है कि फुटपाथ पर सुरक्षित रूप से चलना नागरिकों का मौलिक अधिकार है, जिसे संविधान के अनुच्छेद 19(1)(d) और अनुच्छेद 21 के तहत संरक्षण प्राप्त है। अदालत ने यह भी टिप्पणी की कि सड़कों पर वाहनों की सुविधा से पहले पैदल यात्रियों के अधिकारों को महत्व दिया जाना चाहिए।

जस्टिस पी.एस. नरसिम्हा और जस्टिस ए.एस. चंदुरकर की पीठ ने कहा कि जहां भी सड़क मौजूद हो, वहां पैदल चलने वालों के लिए उचित फुटपाथ का निर्माण और उसका रखरखाव सुनिश्चित करना सरकारों और स्थानीय निकायों की जिम्मेदारी है। अदालत ने इसे केवल प्रशासनिक आवश्यकता नहीं, बल्कि एक प्रवर्तनीय और लागू करने योग्य कर्तव्य बताया।

सुप्रीम कोर्ट की यह टिप्पणी ऐसे समय आई है जब देश के कई शहरों में फुटपाथ अतिक्रमण, अवैध पार्किंग और खराब रखरखाव के कारण पैदल चलना मुश्किल होता जा रहा है। विशेषज्ञों का मानना है कि सुरक्षित फुटपाथों की कमी न केवल दुर्घटनाओं का खतरा बढ़ाती है, बल्कि बुजुर्गों, बच्चों और दिव्यांग नागरिकों की आवाजाही को भी प्रभावित करती है।

इस फैसले को शहरी विकास और नागरिक अधिकारों के क्षेत्र में एक महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है। अदालत के स्पष्ट संदेश के बाद अब राज्यों और नगर निकायों पर दबाव बढ़ेगा कि वे फुटपाथों को अतिक्रमण मुक्त बनाएं, उनका नियमित रखरखाव करें और शहरों को पैदल यात्रियों के लिए अधिक सुरक्षित और सुलभ बनाएं। यह निर्णय करोड़ों लोगों के दैनिक जीवन पर सीधा असर डाल सकता है।