September 5, 2026

न्यूक्लियर से AI तक, अडानी का सबसे बड़ा दांव!

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भारत के कारोबारी जगत में एक बड़ा संकेत देते हुए गौतम अडानी ने भविष्य की विकास रणनीति का खाका पेश किया है। अडानी समूह की वार्षिक आम बैठक (AGM) में उन्होंने न्यूक्लियर ऊर्जा, आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) और विशाल इंफ्रास्ट्रक्चर निवेश को अगले दशक की सबसे बड़ी प्राथमिकता बताया। अडानी ने कहा कि आने वाले समय में ऊर्जा सुरक्षा, तकनीक और राष्ट्रीय क्षमता एक-दूसरे से गहराई से जुड़ी होंगी।

बैठक का सबसे बड़ा ऐलान न्यूक्लियर ऊर्जा क्षेत्र में प्रवेश रहा। अडानी समूह ने ‘अडानी एटॉमिक एनर्जी’ के माध्यम से परमाणु ऊर्जा कारोबार में कदम रखा है और वर्ष 2035 तक 10 गीगावाट न्यूक्लियर क्षमता विकसित करने का लक्ष्य रखा है। बढ़ती औद्योगिक मांग, डेटा सेंटरों के विस्तार और स्वच्छ ऊर्जा की जरूरत को देखते हुए इसे समूह की सबसे महत्वपूर्ण रणनीतिक पहल माना जा रहा है।

AI और डिजिटल इंफ्रास्ट्रक्चर पर भी समूह ने बड़ा दांव खेला है। अडानी ने कहा कि भविष्य की तकनीकी ताकत मजबूत इंफ्रास्ट्रक्चर पर निर्भर करेगी। इसी दिशा में समूह 2030 तक 3 गीगावाट क्षमता वाले डेटा सेंटर प्लेटफॉर्म का निर्माण कर रहा है। विशाखापट्टनम में गूगल के साथ गीगावाट-स्तरीय डेटा सेंटर परियोजना का समझौता भी AI आधारित अर्थव्यवस्था की बढ़ती मांग का संकेत माना जा रहा है।

इसी के साथ समूह ने ऊर्जा, बंदरगाह, हवाई अड्डों, रक्षा और लॉजिस्टिक्स क्षेत्रों में भी बड़े विस्तार की घोषणा की। वित्त वर्ष 2025-26 में अडानी समूह ने 1.5 लाख करोड़ रुपये से अधिक का इंफ्रास्ट्रक्चर निवेश किया, जबकि राजस्व और मुनाफे में भी उल्लेखनीय वृद्धि दर्ज की गई। गौतम अडानी ने स्पष्ट किया कि उनका विजन सिर्फ अगले कुछ वर्षों का नहीं, बल्कि भारत की अगली पीढ़ी की आर्थिक और तकनीकी प्रगति को गति देने का है।

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