November 3, 2026

मां दुर्गा के तीसरे स्वरूप मां चंद्रघंटा की महिमा, साहस और शक्ति का देती हैं संदेश

file_000000003aa081fab3068ec8f2cba41a

शारदीय नवरात्रि के पावन अवसर पर मां दुर्गा के तीसरे स्वरूप मां चंद्रघंटा की पूजा-अर्चना की जाती है। नवरात्रि के तीसरे दिन मां चंद्रघंटा की आराधना का विशेष महत्व माना गया है। उनके मस्तक पर घंटे के आकार का अर्धचंद्र सुशोभित है, जिसके कारण उन्हें चंद्रघंटा कहा जाता है। मां का यह स्वरूप साहस, शौर्य, शांति और शक्ति का प्रतीक माना जाता है।

मां चंद्रघंटा की पौराणिक कथा: पौराणिक मान्यताओं के अनुसार, जब महिषासुर के अत्याचारों से देवता परेशान हो गए, तब उन्होंने भगवान ब्रह्मा, विष्णु और महेश से सहायता की प्रार्थना की। देवताओं की प्रार्थना पर दिव्य शक्तियों के तेज से देवी दुर्गा का प्राकट्य हुआ। उन्हें विभिन्न दिव्य अस्त्र-शस्त्र प्रदान किए गए। मां चंद्रघंटा ने अपने अदम्य साहस और पराक्रम से दुष्ट शक्तियों का सामना किया और देवताओं की रक्षा के लिए युद्ध किया। यह कथा बुराई पर अच्छाई की विजय और धर्म की रक्षा का संदेश देती है।

साहस और शांति का प्रतीक हैं मां चंद्रघंटा: मां चंद्रघंटा को दस भुजाओं वाली देवी के रूप में चित्रित किया जाता है। उनके हाथों में विभिन्न अस्त्र-शस्त्र सुशोभित हैं और उनका वाहन सिंह या बाघ माना जाता है। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, उनकी आराधना से भक्तों को भय पर विजय पाने, आत्मविश्वास बढ़ाने और कठिन परिस्थितियों का साहसपूर्वक सामना करने की प्रेरणा मिलती है। नवरात्रि का यह पावन दिन श्रद्धालुओं को सिखाता है कि जीवन में शांति बनाए रखते हुए अन्याय और बुराई के विरुद्ध दृढ़ता से खड़ा होना चाहिए।

You may have missed