November 5, 2026

कोलकाता एयरपोर्ट मस्जिद पर सियासत, सुरक्षा बनी सबसे बड़ा मुद्दा

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कोलकाता के नेताजी सुभाष चंद्र बोस अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डे परिसर में स्थित 136 वर्ष पुरानी बांकरा (गौरीपुर जामा) मस्जिद में प्रवेश और सामूहिक नमाज़ पर अस्थायी रोक को लेकर राजनीतिक बहस तेज हो गई है। पश्चिम बंगाल के मुख्यमंत्री शुभेंदु अधिकारी ने इस फैसले का समर्थन करते हुए कहा कि राष्ट्रीय सुरक्षा और एयरपोर्ट की सुरक्षा सर्वोच्च प्राथमिकता है। उन्होंने स्पष्ट किया कि रणनीतिक दृष्टि से महत्वपूर्ण अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डे के भीतर बाहरी लोगों की निर्बाध आवाजाही सुरक्षा के लिहाज से उचित नहीं हो सकती।

मुख्यमंत्री ने कहा कि कोलकाता एयरपोर्ट की भौगोलिक स्थिति बेहद संवेदनशील है क्योंकि यह अंतरराष्ट्रीय सीमा के निकट स्थित है। उनके अनुसार, सरकार किसी भी व्यक्ति के धार्मिक अधिकारों का विरोध नहीं कर रही है, लेकिन सुरक्षा मानकों से समझौता नहीं किया जा सकता। दूसरी ओर, मस्जिद प्रबंधन समिति ने प्रवेश पर रोक का विरोध करते हुए कहा कि दशकों से यहां नमाज़ अदा की जाती रही है और किसी स्थायी निर्णय से पहले सभी पक्षों के साथ चर्चा होनी चाहिए।

एयरपोर्ट प्रशासन का कहना है कि मस्जिद परिसर तक पहुंच अस्थायी रूप से रोकी गई है और हाल के दिनों में मरम्मत तथा सुरक्षा कारणों से प्रवेश व्यवस्था में बदलाव किया गया है। इससे पहले भी विमान संचालन, रनवे सुरक्षा और उच्च सुरक्षा क्षेत्र में आम लोगों की आवाजाही को लेकर कई बार चिंताएं जताई जा चुकी हैं। विशेषज्ञों का मानना है कि रनवे के बेहद करीब स्थित इस ढांचे के कारण सुरक्षा और परिचालन से जुड़े तकनीकी मुद्दे लंबे समय से चर्चा का विषय रहे हैं।

यह मामला अब केवल एक धार्मिक स्थल तक सीमित नहीं रह गया है, बल्कि राष्ट्रीय सुरक्षा, विमानन नियमों और धार्मिक स्वतंत्रता के बीच संतुलन की बहस का केंद्र बन गया है। आने वाले दिनों में सरकार, एयरपोर्ट प्राधिकरण और मस्जिद समिति के बीच होने वाली बातचीत पर सभी की नजर रहेगी, क्योंकि इसी से तय होगा कि इस ऐतिहासिक मस्जिद का भविष्य किस दिशा में आगे बढ़ता है।