November 4, 2026

झारखंड में पुलों के ध्वस्त होने के मामलों की जांच तीन महीने में पूरी करें: हाई कोर्ट

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रांची न्यूज: झारखंड हाई कोर्ट ने राज्य के विभिन्न जिलों में पुलों के ध्वस्त होने से जुड़े मामलों की लंबित पुलिस जांच को तीन महीने के भीतर पूरा करने का कड़ा निर्देश दिया है। अदालत ने विशेष रूप से धनबाद, पलामू और गुमला के पुलिस अधीक्षकों (एसपी) को संबंधित प्राथमिकियों (FIR) की जांच जल्द से जल्द पूरी करने के लिए कहा है। हाई कोर्ट की खंडपीठ ने जांच पूरी कर तय समय सीमा के भीतर संबंधित सक्षम न्यायालयों में अंतिम रिपोर्ट (Final Report) दाखिल करने का आदेश सुनिश्चित कराया है।

मुख्य न्यायाधीश एमएस सोनक और जस्टिस मनोज प्रसाद की खंडपीठ ने इस मामले की सुनवाई के दौरान राज्य में पुलों के ढहने के मामलों में एक दशक से भी अधिक समय तक जांच लंबित रहने पर गहरी नाराजगी और चिंता व्यक्त की। अदालत ने साफ शब्दों में चेतावनी दी है कि यदि तय अवधि के भीतर पुलिस जांच या विभागीय कार्यवाही पूरी नहीं की जाती है, तो संबंधित अधिकारियों को व्यक्तिगत रूप से जवाबदेह ठहराया जाएगा। इसके साथ ही निर्धारित समय समाप्त होने के बाद अधिकारियों को देरी के सटीक कारणों को स्पष्ट करते हुए अनुपालन शपथपत्र (Compliance Affidavit) दाखिल करना होगा।

इस जनहित याचिका पर सुनवाई के दौरान राज्य सरकार की ओर से पूर्व में की गई कुछ कार्रवाइयों की भी जानकारी साझा की गई। इसके तहत बताया गया कि खूँटी के तजना नदी पुल (2015) और पलामू के कोयल नदी पुल के क्षतिग्रस्त होने के बाद ठेकेदारों और दोषी अभियंताओं पर ब्लैकलिस्टिंग तथा विभागीय कार्यवाही जैसी कदम उठाए गए हैं। इसी तरह, गुमला जिले में वर्ष 2011 में मानसून के दौरान पुल टूटने की घटना पर एक अधीक्षण अभियंता और 17 कनीय अभियंताओं को निलंबित किया गया था, क्योंकि निर्माण कार्य की गुणवत्ता और मॉनिटरिंग में भारी कमियां पाई गई थीं।

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