September 4, 2026

Harper Collins to publish Sonia Gandhi memoir in India:सोनिया गांधी की बहुप्रतीक्षित आत्मकथा अब भारत में हार्पर कॉलिन्स प्रकाशित करेगा, 10 नवंबर को होगी रिलीज

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सर्च न्यूज: सच के साथ: कांग्रेस की वरिष्ठ नेता सोनिया गांधी की बहुप्रतीक्षित आत्मकथा ‘Belonging: A Journey of Love’ अब भारत में हार्पर कॉलिन्स इंडिया प्रकाशित करेगा। प्रकाशक ने 4 सितंबर 2026 को इसकी घोषणा करते हुए बताया कि किताब 10 नवंबर 2026 को भारत में जारी की जाएगी

इससे पहले इस किताब को भारत में प्रकाशित करने की जिम्मेदारी Penguin Random House India (PRHI) के पास थी। हालांकि, पांडुलिपि के कुछ हिस्सों में सुझाए गए संपादकीय बदलाव और कुछ अंश हटाने को लेकर सोनिया गांधी की टीम और प्रकाशक के बीच सहमति नहीं बन सकी। करीब दो महीने तक चली बातचीत के बाद पेंग्विन ने भारत में किताब प्रकाशित करने से पीछे हटने का फैसला किया।रिपोर्टों के अनुसार, जिन विषयों पर संपादकीय आपत्तियों की चर्चा हुई, उनमें प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का शासनकाल, RSS, सांप्रदायिक तनाव और अल्पसंख्यकों की स्थिति जैसे समकालीन राजनीतिक मुद्दे शामिल थे। हालांकि, Penguin Random House India ने बाहरी दबाव की बात से इनकार किया और कहा कि तथ्य-जांच तथा संपादकीय सुझाव प्रकाशन प्रक्रिया का सामान्य हिस्सा हैं।

पेंग्विन के साथ विवाद के बाद भारत में किताब के प्रकाशन को लेकर अनिश्चितता बनी हुई थी। अब HarperCollins India के आधिकारिक ऐलान के साथ यह स्थिति साफ हो गई है। किताब भारत में उसी दिन जारी होगी, जिस दिन इसका अंतरराष्ट्रीय प्रकाशन भी निर्धारित है। अंतरराष्ट्रीय संस्करण Alfred A. Knopf, जो Penguin Random House का हिस्सा है, प्रकाशित करेगा।

‘Belonging: A Journey of Love’ में सोनिया गांधी के इटली में बचपन, कैम्ब्रिज में उनके जीवन, राजीव गांधी से मुलाकात और विवाह तथा गांधी परिवार का हिस्सा बनने के अनुभवों को शामिल किया गया है।आत्मकथा में भारत में उनके शुरुआती जीवन, हिंदी सीखने, भारतीय संस्कृति और खान-पान के साथ तालमेल बैठाने तथा परिवार पर पड़े बड़े व्यक्तिगत आघातों का भी वर्णन है। इसमें संजय गांधी की मृत्यु, 1984 में इंदिरा गांधी की हत्या और 1991 में राजीव गांधी की हत्या जैसे घटनाक्रमों का व्यक्तिगत प्रभाव भी सामने आने की उम्मीद है।किताब सोनिया गांधी के भारतीय राजनीति में प्रवेश और कांग्रेस के नेतृत्व में उनकी भूमिका पर भी प्रकाश डालती है। खास तौर पर 2004 के लोकसभा चुनाव के बाद कांग्रेस नेतृत्व वाले गठबंधन की सरकार बनने और प्रधानमंत्री पद स्वीकार न करने के उनके फैसले का भी इसमें उल्लेख है।

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