Arka Jain University:अरका जैन विवि में जलवायु परिवर्तन पर महामंथन, संताली बोली में हुई चर्चा
आपदा जोखिम न्यूनीकरण, जलवायु परिवर्तन एवं स्वास्थ्य जोखिम विषयक दो दिवसीय राष्ट्रीय सम्मेलन संपन्न
कोयला खनन के खतरों पर हुई गंभीर चर्चा: सम्मेलन के पहले दिन कई अहम विषयों पर लंबी चर्चा हुई। अरका जैन यूनिवर्सिटी के प्रतिकुलपति प्रो. (डॉ.) अंगद तिवारी कार्यक्रम में मौजूद रहे। निदेशक डॉ. अमित कुमार श्रीवास्तव ने भी इसमें शिरकत की। डॉ. पोम्पी दास सेनगुप्ता ने भी अपनी अहम भूमिका निभाई। आईआईटी (आईएसएम) धनबाद के प्रो. अशोक कुमार इस सत्र के खास मेहमान थे। उन्होंने कोयला खनन से जुड़ी चुनौतियों पर अपनी बेबाक बात रखी। उन्होंने पर्यावरण और समाज पर पड़ने वाले इसके असर को समझाया। साथ ही इससे निपटने के समाधान भी बताए। सिमडेगा के सेंट जेवियर्स कॉलेज के डॉ. राधा महाली भी यहां आए थे। उन्होंने जलवायु परिवर्तन के अलग-अलग पहलुओं पर विस्तार से रोशनी डाली। पहले दिन के तीन सत्रों में कुल 31 शोध-पत्र पढ़े गए।
पारंपरिक ज्ञान से बचेगा जल, जंगल और जमीन: कार्यक्रम के दूसरे दिन भी काफी गहमागहमी रही। दो तकनीकी सत्रों में 20 से ज्यादा शोध-पत्र पेश किए गए। टाटा स्टील लिमिटेड के तीर्थ प्रसाद सापकोटा बतौर अतिथि वक्ता शामिल हुए। उन्होंने कार्बन उत्सर्जन के बढ़ते खतरे गिनाए। जलवायु परिवर्तन पर उन्होंने अपने तथ्यपरक विचार रखे। वहीं, वक्ता रतन टुडू ने एक बेहद खास मुद्दे पर बात की। उन्होंने जल, जंगल और जमीन की अहमियत को सबसे सामने रखा। आपदा जोखिम कम करने में संताली समुदाय के पारंपरिक ज्ञान को काफी कारगर माना गया। इस दौरान स्थानीय समाधानों पर लंबी और सार्थक चर्चा हुई।
शिक्षाविदों ने जताया आभार, दिखा शानदार टीम वर्क: इस भव्य सम्मेलन के संयोजक डॉ. पार्था प्रिय दास थे। उन्होंने आपदा प्रबंधन के कई पहलुओं की विस्तृत जानकारी दी। सह-संयोजक प्रो. बीसी अनंत ने देश भर से आए सभी अतिथियों का आभार जताया। दूसरे दिन के अंत में डॉ. अंकिता सिंह ने धन्यवाद ज्ञापन किया। इस पूरे आयोजन में कई प्राध्यापकों ने जमकर मेहनत की। प्रो. उज्जवल प्रकाश और डॉ. रमा सिंह की भूमिका बेहद शानदार रही। डॉ. निकिता शुक्ला और डॉ. विज्यता ने भी पूरा सहयोग दिया। यह आयोजन हर लिहाज से सफल रहा। इसमें वैज्ञानिक सोच और पारंपरिक ज्ञान का एक अनूठा संगम दिखा। विशेषज्ञों का मानना है कि इससे भविष्य को सुरक्षित बनाने की दिशा में नए रास्ते खुलेंगे।
