November 3, 2026

शारदीय नवरात्रि का चौथा दिन आज, मां कूष्मांडा की आराधना से मिलता है सुख-समृद्धि और सकारात्मक ऊर्जा का आशीर्वाद

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शारदीय नवरात्रि के चौथे दिन मां दुर्गा के चौथे स्वरूप मां कूष्मांडा की पूजा-अर्चना की जाती है। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, मां कूष्मांडा को सृष्टि की रचयिता और ब्रह्मांड में ऊर्जा का संचार करने वाली देवी माना जाता है। नवरात्रि के इस पावन अवसर पर भक्त विधि-विधान से मां की पूजा करते हैं और अपने परिवार की सुख-समृद्धि, स्वास्थ्य तथा खुशहाली की कामना करते हैं। मान्यता है कि मां कूष्मांडा की आराधना से जीवन में सकारात्मकता आती है और भक्तों को कठिन परिस्थितियों का सामना करने की शक्ति मिलती है।

क्यों पड़ा मां का नाम कूष्मांडा?

धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, जब चारों ओर अंधकार व्याप्त था, तब मां दुर्गा के इसी स्वरूप ने अपनी मंद मुस्कान से ब्रह्मांड की रचना की थी। इसी कारण उन्हें मां कूष्मांडा कहा जाता है। मान्यता है कि मां की मुस्कान से ब्रह्मांड में प्रकाश और ऊर्जा का संचार हुआ। उनके नाम में ‘कूष्मांडा’ शब्द को ब्रह्मांड की सृष्टि से जोड़कर देखा जाता है। मां कूष्मांडा को अष्टभुजा देवी भी कहा जाता है, क्योंकि उनकी आठ भुजाएं हैं। उनके हाथों में कमंडल, धनुष, बाण, कमल, अमृत कलश, चक्र और गदा जैसे अस्त्र-शस्त्र एवं वस्तुएं सुशोभित होती हैं। उनके एक हाथ में जपमाला भी मानी जाती है।

मां कूष्मांडा की पूजा का धार्मिक महत्व: नवरात्रि के चौथे दिन मां कूष्मांडा की पूजा करने से आरोग्य, बल, बुद्धि और समृद्धि की प्राप्ति होने की मान्यता है। धार्मिक विश्वास के अनुसार, मां अपने भक्तों के दुखों को दूर कर उन्हें सुखमय जीवन का आशीर्वाद देती हैं। मां कूष्मांडा का स्वरूप हमें यह संदेश देता है कि अंधकार कितना भी गहरा क्यों न हो, सकारात्मक ऊर्जा और विश्वास से जीवन में प्रकाश लाया जा सकता है। इस दिन भक्त सुबह स्नान कर स्वच्छ वस्त्र धारण करते हैं, पूजा स्थल पर मां की प्रतिमा या तस्वीर स्थापित कर पुष्प, फल, धूप, दीप और नैवेद्य अर्पित करते हैं। इसके बाद मां के मंत्रों का जाप और दुर्गा सप्तशती का पाठ किया जाता है।

मां कूष्मांडा को प्रिय है पीला रंग: धार्मिक परंपराओं में मां कूष्मांडा को पीला रंग प्रिय माना जाता है। इसलिए नवरात्रि के चौथे दिन भक्त पीले रंग के वस्त्र धारण करते हैं और मां को पीले फूल, फल तथा मिठाइयां अर्पित करते हैं। कई श्रद्धालु मां को मालपुआ का भोग भी लगाते हैं। हालांकि, पूजा की विधि और भोग की परंपराएं अलग-अलग क्षेत्रों में भिन्न हो सकती हैं।

मां कूष्मांडा की आराधना का संदेश: मां कूष्मांडा की पूजा केवल धार्मिक आस्था का प्रतीक नहीं, बल्कि जीवन में आशा, साहस और सकारात्मकता बनाए रखने की प्रेरणा भी देती है। नवरात्रि का चौथा दिन भक्तों को यह विश्वास दिलाता है कि धैर्य, आत्मविश्वास और अच्छे विचारों के साथ हर चुनौती का सामना किया जा सकता है। इस पावन अवसर पर श्रद्धालु मां कूष्मांडा से अपने परिवार की सुख-शांति, स्वास्थ्य, समृद्धि और मंगलमय जीवन की प्रार्थना करते हैं।

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