Prayagraj:प्रयागराज में गंगा-यमुना का रौद्र रूप, कई मोहल्ले जलमग्न; घरों में घुसा बाढ़ का पानी, सैकड़ों लोग प्रभावित
सर्च न्यूज: सच के साथ: प्रयागराज, 1 सितंबर 2026: संगम नगरी प्रयागराज में गंगा और यमुना के बढ़ते जलस्तर ने एक बार फिर बाढ़ का खतरा बढ़ा दिया है। लगातार बारिश और नदियों में बढ़ते प्रवाह के कारण शहर के कई निचले इलाकों में पानी घुस गया है। कई घरों के आसपास जलभराव की स्थिति बन गई है, जबकि प्रभावित परिवार सुरक्षित स्थानों की ओर जाने को मजबूर हैं।
संगम क्षेत्र में बढ़ते जलस्तर का असर धार्मिक स्थलों तक भी दिखाई दिया है। गंगा का पानी बड़े हनुमान मंदिर के परिसर और दीवार तक पहुंचने की खबर सामने आई है। इससे संगम और कछारी क्षेत्रों में रहने वाले लोगों की चिंता और बढ़ गई है।
हालांकि ताजा रिपोर्टों के अनुसार गंगा और यमुना के जलस्तर में बढ़ोतरी की रफ्तार कुछ धीमी हुई है, लेकिन नदियां अभी भी ऊंचे स्तर पर हैं। फाफामऊ में गंगा का जलस्तर 82.76 मीटर, छतनाग में 82.00 मीटर और नैनी में यमुना का जलस्तर 82.39 मीटर दर्ज किया गया था, जबकि खतरे का निशान 84.73 मीटर बताया गया है।
बाढ़ की आशंका को देखते हुए प्रशासन ने तटीय और निचले इलाकों में निगरानी बढ़ा दी है। राहत एवं बचाव दलों को तैयार रखा गया है और प्रभावित लोगों को सुरक्षित स्थानों पर जाने की सलाह दी जा रही है। NDRF, SDRF और जल पुलिस को भी सतर्क रखा गया है।
प्रयागराज के ग्रामीण और यमुनापार क्षेत्रों में भी नदियों के बढ़ते जलस्तर का असर देखने को मिल रहा है। खेतों में पानी पहुंचने से फसलों को नुकसान की आशंका है। संपर्क मार्गों और घाटों पर भी पानी बढ़ने से आवागमन प्रभावित हो सकता है। प्रशासन लगातार जलस्तर और सहायक नदियों की स्थिति पर नजर रख रहा है।मौसम और नदियों की स्थिति को देखते हुए आने वाले घंटे महत्वपूर्ण माने जा रहे हैं। यदि नदी के जलग्रहण क्षेत्रों में बारिश जारी रहती है या नदियों में पानी का प्रवाह बढ़ता है, तो प्रयागराज के अन्य निचले इलाकों में भी जलभराव बढ़ सकता है। ऐसे में प्रशासन ने लोगों से अफवाहों से बचने, नदी के किनारे न जाने और स्थानीय प्रशासन के निर्देशों का पालन करने की अपील की है।
