September 6, 2026

Jharkhand: नगड़ी में रिम्स-2 परियोजना को लेकर बढ़ा बवाल, जमीन बचाने के लिए ग्रामीणों ने सरकार के खिलाफ खोला मोर्चा, मुख्यमंत्री आवास से पहले पुलिस ने रोका

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सर्च न्यूज: सच के साथ: रांची के नगड़ी क्षेत्र में प्रस्तावित रिम्स-2 (RIMS-2) परियोजना के निर्माण के विरोध में स्थानीय ग्रामीणों और किसानों ने मुख्यमंत्री आवास के घेराव के लिए एक विशाल मार्च निकाला। इस आंदोलन का नेतृत्व कर रहे ग्रामीणों को सुरक्षा व्यवस्था के मद्देनजर पुलिस प्रशासन ने मुख्यमंत्री आवास तक पहुँचने से पहले ही कांके ब्लॉक चौक के पास बैरिकेडिंग लगाकर रोक दिया।

1. उपजाऊ भूमि अधिग्रहण का कड़ा विरोध: नगड़ी मौजा के रैयतों और स्थानीय आदिवासियों का आरोप है कि जिस जमीन पर सरकार ₹4,149 करोड़ की लागत से रिम्स-2 सुपर स्पेशियलिटी अस्पताल का निर्माण कराना चाहती है, वह उनकी पुश्तैनी उपजाऊ कृषि भूमि है। ग्रामीणों का कहना है कि इस जमीन से सैकड़ों परिवारों की आजीविका और पेट जुड़ा हुआ है। उनका तर्क है कि क्षेत्र में कई अन्य बंजर जमीनों के विकल्प मौजूद होने के बावजूद सरकार जानबूझकर किसानों की खेती योग्य जमीन छीन रही है।

2. मुख्यमंत्री आवास घेराव और पुलिस की कार्रवाई: अपनी मांगों को सीधे राज्य के मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन के समक्ष रखने के लिए सैकड़ों की संख्या में महिला, पुरुष और युवा प्रदर्शनकारियों ने नगड़ी से एक विशाल पद-यात्रा (मार्च) शुरू की। जैसे ही यह रैली मुख्यमंत्री आवास की ओर आगे बढ़ी, पहले से मुस्तैद रांची पुलिस ने कांके ब्लॉक चौक पर मजबूत बैरिकेडिंग कर आंदोलनकारियों को आगे बढ़ने से रोक दिया। इस दौरान प्रदर्शनकारियों और पुलिस के बीच तीखी नोकझोंक भी हुई, जिसके बाद सुरक्षा के लिए भारी पुलिस बल की तैनाती कर दी गई।

3. पूर्व मुख्यमंत्री चंपाई सोरेन का समर्थन: इस भूमि विवाद को लेकर राजनीतिक माहौल भी गरमा गया है, क्योंकि पूर्व मुख्यमंत्री चंपाई सोरेन ने ग्रामीणों के इस आंदोलन को अपना खुला समर्थन दिया है। उन्होंने सरकार की मंशा पर सवाल उठाते हुए चेतावनी दी है कि अगले कुछ दिनों में लाखों आदिवासी और मूलवासी किसानों के हक में सड़कों पर उतरेंगे। आंदोलनकारी नेताओं ने भी दो-टूक कहा है कि यदि मुख्यमंत्री से उनकी सीधी वार्ता नहीं कराई गई, तो वे अनिश्चितकालीन धरने और भूख हड़ताल पर बैठने के लिए विवश होंगे।

4. प्रशासन का रुख और परियोजना का महत्व: दूसरी ओर, जिला प्रशासन और रांची डीसी का कहना है कि यह परियोजना झारखंड के स्वास्थ्य ढांचे को देश के शीर्ष मेडिकल हब के रूप में स्थापित करने के लिए बेहद जरूरी है। प्रशासन के अनुसार, प्रभावित भूमि स्वामियों को नियमानुसार उचित मुआवजा दिया जा चुका है और निर्माण स्थल की सुरक्षा सुनिश्चित की जा रही है। अधिकारियों ने आश्वासन दिया है कि अस्पताल का काम पूरा होने के बाद स्थानीय ग्रामीणों के शिक्षित युवाओं को प्राथमिकता के आधार पर रोजगार के अवसर भी मुहैया कराए जाएंगे।

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