September 6, 2026

“A Single Meeting That Changed His Life’s Direction”: एक मुलाकात ने बदल दी जिंदगी की दिशा, सुदिव्य कुमार सोनू के पिता को मनाने खुद पहुंचे थे दिशोम गुरु

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सर्च न्यूज: सच के साथ: रांची/गिरिडीह: सुदिव्य कुमार सोनू के असामयिक निधन के बाद उनके राजनीतिक जीवन से जुड़े कई ऐसे प्रसंग सामने आ रहे हैं, जो उनके संघर्ष और झारखंड आंदोलन के प्रति उनकी प्रतिबद्धता को समझने में मदद करते हैं। इनमें सबसे भावुक कहानी उस दौर की है, जब एक युवा सुदिव्य ने राजनीति को अपना भविष्य बनाने का फैसला किया और उनके परिवार को यह निर्णय स्वीकार करना आसान नहीं था।सुदिव्य सोनू का परिवार पारंपरिक रूप से राजनीति से दूर रहा था। उपलब्ध रिपोर्टों के मुताबिक, उनके परिवार की कई पीढ़ियां सरकारी सेवा से जुड़ी रही थीं। छात्र जीवन में झारखंड अलग राज्य आंदोलन को लेकर होने वाली चर्चाओं और तानों ने उनके भीतर अपनी माटी और पहचान को लेकर एक अलग सोच पैदा की।

1989 में हुई वह मुलाकात बनी निर्णायक मोड़: साल 1989 में सुदिव्य सोनू की मुलाकात झामुमो नेता और झारखंड आंदोलन के प्रमुख चेहरे शिबू सोरेन से हुई। बातचीत के दौरान जब सोरेन को पता चला कि सुदिव्य पढ़े-लिखे युवा हैं, तो उन्होंने उन्हें आंदोलन से जुड़ने के लिए प्रेरित किया। बाद में सुदिव्य ने स्वयं एक इंटरव्यू में इस मुलाकात को अपने जीवन की दिशा बदलने वाली घटना के रूप में याद किया था। इसके बाद राजनीति उनके लिए केवल सत्ता तक पहुंचने का माध्यम नहीं रही। उन्होंने संगठन के साथ काम करते हुए झारखंड आंदोलन और जनसरोकार से जुड़े मुद्दों में सक्रिय भूमिका निभानी शुरू की।

जब पिता राजनीति के खिलाफ थे: परिवार चाहता था कि सुदिव्य अपना करियर बनाएं और स्थिर जीवन जिएं। राजनीति में सक्रियता बढ़ने के साथ उनके पिता की चिंता भी बढ़ती गई। लेकिन वर्षों बाद एक मुलाकात ने इस स्थिति को बदल दिया।2004-05 के आसपास शिबू सोरेन सुदिव्य सोनू के गिरिडीह स्थित घर पहुंचे। उपलब्ध रिपोर्टों के अनुसार, वहां उन्होंने सुदिव्य के पिता के प्रति सम्मान जताते हुए उनके पैर छुए और बेटे को लेकर भरोसा दिलाया। उनका संदेश था कि सुदिव्य को वे अपने साथ लेकर जा रहे हैं और उसे आगे बढ़ाने की जिम्मेदारी उनकी होगी। यह घटना सुदिव्य के लिए महज पारिवारिक प्रसंग नहीं थी। उनके अपने बयान के अनुसार, इस मुलाकात के बाद उनके पिता का नजरिया बदला और उन्होंने सुदिव्य के राजनीतिक जीवन को लेकर पहले जैसा विरोध नहीं किया।

कार्यकर्ता से मंत्री तक का सफर: सुदिव्य सोनू ने संगठन के सामान्य कार्यकर्ता के रूप में शुरुआत की और वर्षों तक झामुमो में अलग-अलग जिम्मेदारियां निभाईं। वे 2019 में पहली बार गिरिडीह से विधायक चुने गए और 2024 में दोबारा जीत दर्ज की। इसके बाद उन्हें झारखंड सरकार में कैबिनेट मंत्री की जिम्मेदारी मिली। उनकी राजनीतिक यात्रा करीब साढ़े तीन दशक तक चली—एक ऐसे युवा से, जिसने आंदोलन की आवाज को करीब से महसूस किया, संगठन में लंबा समय बिताया और अंततः राज्य सरकार में महत्वपूर्ण जिम्मेदारी तक पहुंचा।सुदिव्य सोनू की कहानी में राजनीति से ज्यादा एक विश्वास की कहानी दिखाई देती है—एक गुरु का अपने शिष्य पर भरोसा, एक पिता की चिंता और उस भरोसे को सही साबित करने के लिए दशकों तक किया गया संघर्ष।

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